Self-Help Groups – SHG एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक पहल है जो खासकर ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास को बढ़ावा देती है। SHG एक ऐसा संगठन होता है जिसमें एक समूह के लोग अपनी सामूहिक ताकत का इस्तेमाल कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने, सामाजिक समस्याओं को हल करने और आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए एक साथ काम करते हैं।
SHG एक ऐसी सामाजिक संरचना है जो आमतौर पर ग्रामीण भारत में सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बनाई जाती है। SHG का मूल उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक नज़रिए से कमजोर वर्ग के लोगों को एकजुट करना और उनके जीवन स्तर को सुधारना है। यह एक ऐसी पहल है जिसमें लोग स्वेच्छा से एक समूह में शामिल होते हैं, अपनी समस्याओं का सामूहिक समाधान ढूंढते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं।
आज के इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे, कि SHG क्या होता है, इसकी संरचना, इसके उद्देश्यों, इसके फायदे, इसकी चुनौतियाँ और कैसे यह भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बारें जानेंगे, इसलिए इस लेख को आखिर तक पढ़ियेगा ताकि बाद में आपको कोई परेशानी न हो सकें।
Self-Help Groups एक ऐसा छोटे स्तर का संगठन होता है जिसमें आमतौर पर 10-20 सदस्य होते हैं। यह सदस्य अक्सर समान सामाजिक-आर्थिक स्थिति से होते हैं और सामूहिक रूप से अपनी आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का समाधान ढूंढते हैं। SHG (Self-Help Groups) के सदस्य अपने-अपने छोटे-छोटे बचत योगदान करते हैं, और इन बचतों को एक समूह कोष के रूप में एकत्रित किया जाता है। यह कोष समूह के सदस्यों को जरूरत के अनुसार लोन प्रदान करने, आपसी सहयोग और सामूहिक कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
Self-Help Groups का विचार सबसे पहले 1970 के दशक में भारत में उभरा, जब कई सामाजिक और आर्थिक एक्सपेर्टो ने देखा कि ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में विकास की गति को तेज करने के लिए सामुदायिक प्रयासों की जरुरत है। इस नज़रिए को अपनाते हुए, भारत सरकार और अलग – अलग गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) ने SHG की अवधारणा को लागू किया। SHG के जरिए आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ सामाजिक सुधारों की दिशा में भी काम किया गया हैं।
SHG की संरचना करने में कुछ मुख्य तत्व शामिल होते हैं:
SHG के कई निम्नलिखित उद्देश्य होते हैं:
SHG के कामो में निम्नलिखित गतिविधियों शामिल होती हैं:

SHG के सामने कई चुनौतियाँ होती हैं, जिनमें निम्नलिखित चुनौतियां शामिल हैं:
SHG के कई फायदे होते हैं, जिनमें निम्नलिखित फायदे शामिल हैं:
Self-Help Groups एक प्रभावशाली पहल है जो भारतीय समाज के अलग – अलग सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को सुधारने का काम करती है। यह सदस्यता, सहयोग, और सामूहिक प्रयास के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देती है। हालांकि, SHG के सामने कुछ चुनौतियाँ भी होती हैं, लेकिन सही मार्गदर्शन और संसाधनों के साथ यह चुनौतियाँ पार की जा सकती हैं। SHG के माध्यम से हम एक आत्मनिर्भर और सशक्त समाज की दिशा में अग्रसर हो सकते हैं, जहाँ हर व्यक्ति को अपनी क्षमताओं को पूर्ण रूप से उजागर करने का अवसर मिले।
SHG (Self-Help Groups) एक ऐसा सामाजिक तंत्र है जो ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में विकास, सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार को प्रोत्साहित करता है। इसके माध्यम से न केवल आर्थिक सुधार संभव होता है, बल्कि समाज में एकता और सहयोग की भावना भी बढ़ती है। SHG की अवधारणा और कार्यप्रणाली को समझना और इसे सही दिशा में लागू करना समाज के विकास के लिए जरुरी है। इस प्रकार, SHG एक शक्तिशाली उपकरण है जो भारत के सामाजिक और आर्थिक नज़रिए में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
प्रश्न: SHG (Self Help Group) क्या होता है?
उत्तर: स्व-सहायता समूह (SHG) एक छोटे स्तर का सामूहिक संगठन होता है जिसमें आमतौर पर 10-20 सदस्य होते हैं। ये सदस्य अपनी छोटी-छोटी बचतों को एकत्रित करके एक साझा कोष बनाते हैं, जिससे वे आपसी ऋण की व्यवस्था करते हैं और सामूहिक रूप से अपनी आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का समाधान ढूंढते हैं।
प्रश्न: SHG में कौन-कौन सदस्य बन सकते हैं?
उत्तर: एस.एच.जी. में आमतौर समान सामाजिक-आर्थिक स्थिति वाले लोग सदस्य बनते हैं। ज्यादातर SHG ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं गठित करती हैं, लेकिन इसमें पुरुषों और युवाओं का भी शामिल होना संभव है।
प्रश्न: SHG की मुख्य काम क्या होते हैं?
उत्तर: एस.एच.जी. की मुख्य गतिविधियों में नियमित बचत, आपसी ऋण की व्यवस्था, सामूहिक व्यापारिक उपक्रमों की स्थापना, सामाजिक जागरूकता फैलाना, और सामुदायिक विकास की दिशा में कार्य करना शामिल है।
प्रश्न: SHG के सदस्यों को किस प्रकार के लोन मिलते हैं?
उत्तर: एस.एच.जी. के सदस्यों को समूह के साझा कोष से छोटे-छोटे लोन दिए जाते हैं। यह लोन आमतौर पर कम ब्याज दर पर होते हैं और इसका उपयोग आपातकालीन जरूरतों, छोटे व्यवसायों की स्थापना, शिक्षा, और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए किया जा सकता है।
प्रश्न: SHG के लिए कितना बचत योगदान जरुरी होता है?
उत्तर: एस.एच.जी. के लिए बचत योगदान की राशि समूह द्वारा तय की जाती है, और यह राशि आमतौर पर छोटे स्तर की होती है ताकि सभी सदस्य इसे नियमित रूप से जमा कर सकें। यह राशि मासिक या साप्ताहिक आधार पर जमा की जाती है।
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