Loan Settlement करवाते समय ये ध्यान रखे की बैंक आपसे ज्यादा से ज्यादा रकम लेने की कोसिस करेगा, लेकिन आपको लोन की बात 15-25% से स्टार्ट करनी चाहिए।
अगर आपका लोन काफी पुराना है और बैंक उसे सेटल करना चाहती है तो 15 से 25% में लोन सेटल हो जाते हैं क्योंकि ऐसे में बैंक को भी अपना नॉन- परफोर्मिंग एसेट (NPA) कम करना होता है। जब भी आप बैंक से लोन सेटल कराते हैं तो कोशिश करिए की जितना कम से कम हो सके, उतना कम करवाए।
लोन सेटलमेंट राशि वह रकम होती है जिसे आप एक बार में पूरी तरह से चुकाकर अपने लोन को बंद कर सकते हैं। इसका मतलब है कि आप अपने लोन की बकाया राशि और उससे जुड़े ब्याज को पूरी तरह से चुका देते हैं, और आपके लोन अकाउंट बंद हो जाता है। यह राशि लोन के पूरे बकाया मूलधन और ब्याज के अलावा अन्य चार्जेस और फीस को भी शामिल करती है।
लोन की सेटलमेंट राशि को तय करने में कई कारक शामिल होते हैं:
सेटलमेंट राशि को निमन्लिखित तरीको से गिन सकते है:
उदाहरण के लिए, यदि आपके लोन का बकाया मूलधन ₹1,00,000 है और ब्याज ₹10,000 है, और बैंक द्वारा प्रीपेमेंट चार्ज ₹2,000 है, तो आपकी सेटलमेंट राशि ₹1,12,000 होगी।
लोन को सेटल करने के लिए निम्नलिखित सामान्य प्रक्रिया का पालन किया जा सकता है:

दस्तावेज़ की सही मुआयना करें: सेटलमेंट के बाद सभी दस्तावेज़ और प्रमाण का मुआयना करें ताकि भविष्य में कोई समस्या न आए।
फाइनेंसियल सलाहकार की मदद लें: यदि आप सेटलमेंट प्रक्रिया को लेकर अनिश्चित हैं, तो किसी आर्थिक सलाहकार की मदद लें।
लोन सेटलमेंट और कानूनी दृष्टिकोण: लोन सेटलमेंट प्रक्रिया के दौरान कानूनी पहलुओं को समझना भी आवश्यक है। कई बार, सेटलमेंट के लिए लेंडर और उधारकर्ता के बीच एक कानूनी दस्तावेज तैयार किया जाता है, जिसमें सेटलमेंट की शर्तें स्पस्ट रूप से लिखी होती हैं। यह दस्तावेज दोनों पक्षों के अधिकार और कर्तव्यों को स्पष्ट करता है और किसी भी विवाद की स्थिति में एक कानूनी आधार प्रदान करता है।
सेटलमेंट पर टैक्स के प्रभाव: लोन सेटलमेंट के दौरान, सेटलमेंट राशि पर टैक्स की जिम्मेदारी भी हो सकती है। कई देशों में, सेटलमेंट पर प्राप्त छूट को आय के रूप में माना जा सकता है और इस पर टैक्स लग सकता है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि सेटलमेंट राशि पर टैक्स के नियम क्या हैं और इसे सही तरीके से रिपोर्ट करना जरूरी है।
स्मार्ट नेगोशिएशन तकनीक: लोन सेटलमेंट के दौरान, स्मार्ट नेगोशिएशन तकनीक अपनाना लाभकारी हो सकता है।यह तकनीक उधारकर्ता को बेहतर शर्तें और कम से कम राशि के साथ सेटलमेंट प्राप्त करने में मदद कर सकती है। इसके लिए, उधारकर्ता को पहले से ही अपनी आर्थिक स्थिति और लेंडर की नीतियों का अच्छी तरह से अध्ययन करना चाहिए और एक उचित प्रस्ताव तैयार करना चाहिए।
फाइनेंशियल काउंसलिंग का महत्व: लोन सेटलमेंट की प्रक्रिया को सुचारू और प्रभावी बनाने के लिए आर्थिक काउंसलिंग प्राप्त करना महत्वपूर्ण हो सकता है। आर्थिक सलाहकार उधारकर्ता को उनके विकल्पों के बारे में सही जानकारी प्रदान कर सकते हैं और सेटलमेंट के दौरान संभावित जोखिमों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
लोन सेटलमेंट की बजाय अन्य विकल्प: लोन सेटलमेंट के अलावा, कई अन्य विकल्प भी हो सकते हैं जिन्हें उधारकर्ता पर विचार कर सकते हैं,जैसे कि लोन री-स्ट्रक्चरिंग, कंसोलिडेशन, या लोन डिफॉल्ट के बदले पुनर्वित्त। ये विकल्प भी उधारकर्ता को उनकी आर्थिक स्थिति के आधार पर बेहतर समाधान प्रदान कर सकते हैं।
लोन सेटलमेंट का प्रभाव लोन की पुनर्निर्माण पर: लोन सेटलमेंट का प्रभाव केवल उधारकर्ता के मौजूदा लोन पर ही नहीं, बल्कि भविष्य में नए लोन लेने की क्षमता पर भी पड़ सकता है। लोन सेटलमेंट के रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए बैंकों और आर्थिक संस्थानों में उधारकर्ता को भविष्य में लोन प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। इसे ठीक करने के लिए, उधारकर्ता को अपनी क्रेडिट रिपोर्ट को नियमित रूप से देखना और सुधारने के उपायों पर ध्यान देना चाहिए।
सेटलमेंट की संभावित लंबी अवधि: Loan Settlement की प्रक्रिया कभी-कभी समय ले सकती है। इसमें लेंडर की स्वीकृति, दस्तावेज़ तैयार करना, और भुगतान की प्रक्रिया शामिल होती है। इसलिए, उधारकर्ता को इस प्रक्रिया के लिए उचित समय देना और धैर्य बनाए रखना जरूरी है।
Loan Settlement की योजना बनाते समय सावधानियाँ: जब उधारकर्ता लोन सेटलमेंट की योजना बनाते हैं, तो उन्हें सावधानीपूर्वक योजना बनानी चाहिए। इसमें सेटलमेंट राशि, भुगतान की समय सीमा, और अन्य शर्तें स्पष्ट रूप से तय की जानी चाहिए। इसके अलावा, सभी संचार और दस्तावेज़ों को सही तरीके से संभालना और सुरक्षित रखना चाहिए।
सर्विस चार्ज और हिडन फीस: लोन सेटलमेंट के दौरान, कुछ बैंकों या आर्थिक संस्थानों द्वारा सर्विस चार्ज या हिडन फीस लगाए जा सकते हैं। उधारकर्ता को इन एक्स्ट्रा खर्चों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए और पक्का करना चाहिए कि सेटलमेंट के समस्त खर्चे स्पष्ट रूप से बताए गए हैं।
लोन सेटलमेंट और क्रेडिट कार्ड: यदि उधारकर्ता के पास क्रेडिट कार्ड लोन है, तो सेटलमेंट प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। क्रेडिट कार्ड लोन की सेटलमेंट प्रक्रिया और शर्तें अन्य प्रकार के लोन से अलग हो सकती हैं। इसके लिए, क्रेडिट कार्ड कंपनी की नीतियों को समझना और सही जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है।
Loan Settlement वह राशि होती है जो सेटलमेंट करवाते समय एक बार पे करना होता है। इस भुगतान के बाद आप हर महीने की EMI से बच जायेंगे। परन्तु इसके कुछ लाभ और कुछ हानि भी हैं, इसीलिए हर चीज़ को सोच ओ समझ के अच्छे से करना चाहिए। अगर आपको वन-टाइम सेटलमेंट करने आपको किसी भी तरह की शंका आती है तो, आप आर्थिक सलहाकार से कंसल्ट कर सकते हैं। सेटलमेंट करवाते समय ऊपर दिए गए सलाहओ का ध्यान रखे।
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