Loan Settlement और Loan Closure, दोनों ही लोन समाप्त करने की प्रक्रियाएं हैं, लेकिन इनमें काफी अंतर होते हैं। Loan Settlement तब किया जाता है जब उधारकर्ता पूरी लोन राशि चुकाने में असमर्थ होता है और बैंक से समझौता करता है, जिससे बैंक लोन की कुछ राशि माफ कर देता है।
हालांकि, इससे CIBIL स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और भविष्य में लोन लेने में मुश्किल हो सकती है। यह आमतौर पर तब किया जाता है जब उधारकर्ता गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा होता है। दूसरी ओर, Loan Closure तब होता है जब उधारकर्ता पूरी लोन राशि (मूलधन और ब्याज सहित) चुका देता है और लोन को पूरी तरह से समाप्त कर देता है।
इसके बाद बैंक द्वारा No Objection Certificate (NOC) जारी किया जाता है, जिससे यह साबित होता है कि लोन पूरी तरह से चुकता कर दिया गया है। Loan Closure से CIBIL स्कोर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और भविष्य में लोन लेने में कोई समस्या नहीं होती हैं। अगर आपके पास लोन की पूरी राशि चुकाने की क्षमता है, तो Loan Closure सबसे अच्छा विकल्प है, क्योंकि यह वित्तीय रूप से स्थिरता प्रदान करता है और क्रेडिट स्कोर को बनाए रखता है।
Loan Settlement और Loan Closure दोनों ही एक वित्तीय शब्द हैं, जो लोन के अंतिम चरण से जुड़े हुए होते हैं, लेकिन इन दोनों का मतलब और प्रक्रिया अलग-अलग होती है। सबसे पहले, यह समझना जरूरी है कि जब भी कोई व्यक्ति लोन लेता है, तो वह उसे एक निश्चित समय के भीतर उसे चुकता करने की जिम्मेदारी लेता है। अगर किसी कारणवश उसे लोन चुकता करने में कोई मुश्किल पैदा होती है, तो वह दो विकल्पों का सामना कर सकता है: Loan Settlement या Loan Closure।
Loan Settlement तब होता है जब लोन का भुगतान पूरा नहीं हो पाता और उधार लेने वाला व्यक्ति बैंक या वित्तीय संस्था से बातचीत कर तय करता है कि वह लोन का कुछ हिस्सा चुकता करेगा और बाकी हिस्से को माफ किया जाएगा। इस प्रक्रिया में उधारी का बाकी हिस्सा, जो पूरा नहीं चुकता किया जा सकता, बैंक या लेंडिंग एजेंसी द्वारा माफ कर दिया जाता है।
वहीं, Loan Closure का मतलब होता है लोन का पूरा भुगतान करना और उस पर पूरी तरह से खत्म करना। जब उधारकर्ता अपने पूरे लोन, ब्याज और किसी भी प्रकार के शुल्क का भुगतान कर देता है, तो लोन को बंद कर दिया जाता है। Loan Closure की प्रक्रिया में कोई समझौता नहीं होता हैं, बल्कि पूरी राशि का भुगतान करके लोन को इनएक्टिव किया जाता है।
इस लेख में हम Loan Settlement और Loan Closure के बीच के अंतर को विस्तार से समझेंगे। यह दोनों ही प्रक्रिया लोन चुकता करने से जुड़ी हैं, लेकिन दोनों के बीच महत्वपूर्ण फर्क भी होते हैं। Loan Settlement तब होता है जब उधारकर्ता बैंक से बातचीत कर कुछ हिस्से का माफ करने का समझौता करता है, जबकि Loan Closure तब होता है जब उधारकर्ता पूरे लोन का भुगतान करके उसे बंद करता है।
यह एक ऐसी वित्तीय प्रक्रिया होती है जिसमें बैंक या वित्तीय संस्था लोन लेने वाले व्यक्ति को पूरी बकाया लोन की राशि को चुकाने के बजाय कम राशि देकर लोन निपटाने का मौका देती है। यह सुविधा उन लोगों के लिए होती है जो किसी कारण से अपना लोन समय पर नहीं चुका पाते हैं और लगातार डिफॉल्ट कर रहे होते हैं।
सेटलमेंट के तहत बैंक एकमुश्त राशि (लंपसम अमाउंट) पर सहमति बना सकता है, जिससे लोन बंद हो जाता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि लोन सेटलमेंट करने से आपका CIBIL स्कोर प्रभावित हो सकता है, जिससे भविष्य में आपको लोन लेने में मुश्किल हो सकती है। इसलिए, इसे अंतिम विकल्प के रूप में ही अपनाना चाहिए।
जब कोई व्यक्ति अपने पर्सनल लोन की EMI समय पर चुकाने में असमर्थ हो जाता है और लंबे समय तक बकाया राशि जमा हो जाती है, तो बैंक या वित्तीय संस्था लोन सेटलमेंट का विकल्प देती है। इसमें बैंक ग्राहक को पूरी बकाया राशि के बजाय रियायती रकम (discounted amount) चुकाने का मौका देता है, जिससे लोन का मामला निपट जाता है।
सेटलमेंट की प्रक्रिया में ग्राहक और बैंक के बीच बातचीत होती है, जहां बैंक इस बात की पुष्टि करता है कि ग्राहक लोन का पूरा भुगतान नहीं कर सकता हैं। इसके बाद, बैंक एक सिंगल-शॉट पेमेंट ऑफर देता है, जो आमतौर पर बकाया लोन राशि से कम होता है। जब ग्राहक इस सहमत राशि का भुगतान कर देता है, तो बैंक लोन को “Settled” के रूप में रिपोर्ट करता है। हालांकि, यह CIBIL स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है क्योंकि इसे “Complete Payment” नहीं माना जाता हैं।
इसलिए, लोन सेटलमेंट को अंतिम विकल्प के रूप में ही चुनना चाहिए और अगर संभव हो, तो लोन रीपेमेंट प्लान, लोन री-स्ट्रक्चरिंग या अन्य वित्तीय समाधान पर विचार करना चाहिए ताकि क्रेडिट स्कोर खराब न हो।
आइए Loan Settlement और Loan Closure इन दोनों को विस्तार से समझते हैं:
निम्नलिखित दस्तावेजों की आवशयकता होती हैं:
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इसका असर निम्नलिखित तरीकों से देखा जा सकता है:
यहां कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान देने की जरुरत है, जो आपको सही Loan Settlement सर्विस चुनने में मदद करेंगे:
सेटलमेंट की सर्विस को लेने से पहले, यह सुनिश्चित करें कि जिस सर्विस प्रदाता से आप मदद ले रहे हैं, वह वित्तीय संस्थाओं और बैंकों के साथ रजिस्टर्ड और प्रमाणित हो। एक भरोसेमंद सर्विस प्रदाता ही आपको सही मार्गदर्शन और सहायता प्रदान कर सकता है। ऑनलाइन रिव्यू और ग्राहक की फीडबैक देखना एक अच्छा तरीका हो सकता है।
कई सर्विस प्रदाता सेवा शुल्क भी लेते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि शुल्क ज्यादा न हो और कोई छिपे हुए खर्च न हों। सर्विस प्रदाता से पहले से समझौता करें कि कौन सी सेवाएं मुफ्त हैं और किनके लिए आपको अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
सर्विस प्रदाता द्वारा दी जाने वाली सेटलमेंट की प्रक्रिया को ध्यान से समझें। क्या वे आपकी पूरी स्थिति को समझते हैं और बैंक के साथ बातचीत करने के लिए आपको बेहतर समाधान प्रदान करते हैं? एक अच्छा प्रदाता आपको कागजात और प्रक्रिया से पूरी जानकारी देगा, ताकि आप पूरी प्रक्रिया को सही तरीके से समझ सकें।
आपको यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सेवा प्रदाता कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त हो और उसके पास उन सभी अधिकारों की जानकारी हो जो आपके लोन के सेटलमेंट से जुड़े हैं। इससे आपको आगे किसी भी कानूनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सेटलमेंट की प्रक्रिया को चुनने से पहले, यह सुनिश्चित करें कि सर्विस प्रदाता वैकल्पिक समाधान जैसे लोन री-स्ट्रक्चरिंग या नए भुगतान प्लान के बारे में भी आपको जानकारी दे रहा हो। ये विकल्प कभी-कभी सेटलमेंट से बेहतर हो सकते हैं और आपके CIBIL स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालते हैं।
एक अच्छा सर्विस प्रदाता हमेशा ग्राहक के साथ संपर्क में रहेगा और आपकी समस्याओं का समाधान सही से करेगा। सुनिश्चित करें कि वे आपके सवालों का जवाब जल्दी देते हैं और किसी भी मुश्किल स्थिति में आपके साथ काम करने के लिए तैयार रहते हैं।
अगर आप भी कर्ज के जाल में फंस गए हैं और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और Loan Settlement का रास्ता अपनाना चाहते है तो आप हमारी Loan Settlement की सेवा के लिए आवेदन कर सकते हैं। हम आपके लोन का सेटलमेंट करने में आपकी सहयता कर्नेगे। इसके साथ ही हम आपको 6 – 8 महीने के अंदर लोन के बोझ से राहत प्रदान करवाते हैं। अगर आपको हमारी सेवा के बारे में और ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी हैं तो आप हमें सपर्क कर सकते हैं।
सेटलमेंट की प्रक्रिया का समय अलग – अलग कारकों पर भी निर्भर करता है, जैसे आपके बैंक या लोन देने वाली संस्था की पॉलिसी, बकाया राशि, और आप दोनों के बीच बातचीत। आमतौर पर यह प्रक्रिया 1 से 3 महीने तक का समय ले सकती है।
सेटलमेंट की प्रक्रिया में सबसे पहला कदम बैंक से बातचीत करना होता है, जहां आप अपनी मुश्किलों और भुगतान की स्थिति के बारें में बैंक को समझाते हैं। इसके बाद, बैंक आपकी स्थिति के आधार पर एक सेटलमेंट का ऑफर देता है। अगर आप उस ऑफर को स्वीकार करते हैं, तो बैंक को तय समय सीमा के भीतर भुगतान करना होता है। फिर बैंक लोन को सेटल के रूप में रिपोर्ट करता है, जो कुछ समय ले सकता है।
इस पूरी प्रक्रिया में जितना ज्यादा समय लगेगा, उतना ही आपके CIBIL स्कोर पर प्रभाव डाल सकता है, इसलिए जल्दी से जल्दी समाधान तलाशना बेहतर रहता है।
हालांकि Loan Settlement और Loan Closure दोनों का उद्देश्य लोन को खत्म करना होता है, लेकिन इन दोनों के बीच काफी अंतर होते हैं।
सेटलमेंट तब होता है जब उधारकर्ता पूरी लोन की राशि का भुगतान नहीं कर सकता और बैंक या वित्तीय संस्थान से समझौता करता है। इस स्थिति में, बैंक या संस्था उधारकर्ता से कम लोन की राशि लेकर बाकी का लोन माफ कर देती है। इस प्रक्रिया में उधारकर्ता को एकमुश्त राशि चुकानी होती है, जो पूरे लोन से कम होती है। यह आमतौर पर तब होता है जब उधारकर्ता आर्थिक संकट से गुजर रहा होता है या उसकी भुगतान करने की क्षमता पूरी नहीं हो रही होती हैं।
Loan Closure तब होता है जब उधारकर्ता पूरी लोन की राशि का भुगतान करता है, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। इस स्थिति में, लोन को पूरी तरह से चुकता किया जाता है और बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा लोन को बंद कर दिया जाता है। जब लोन का पूरा भुगतान हो जाता है, तो उधारकर्ता को NOC (No Objection Certificate) प्रदान किया जाता है, जो यह प्रमाणित करता है कि लोन की पूरी राशि चुका दी गई है और लोन को समाप्त कर दिया गया है।
इसके निम्नलिखित फायदे और नुकसान हैं:
Loan Settlement और Loan Closure दोनों ही लोन के समाप्त होने की प्रक्रिया होती हैं, लेकिन इन दोनों में काफी अंतर होते हैं। Loan Settlement तब होता है जब उधारकर्ता पूरी लोन राशि का भुगतान नहीं कर पाता हैं और बैंक या वित्तीय संस्थान से कुछ राशि माफ करने की सहमति प्राप्त करता है। इस प्रक्रिया में कुछ हिस्से का माफी मिलती है, लेकिन इससे CIBIL स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, और भविष्य में लोन लेना मुश्किल हो सकता है।
वहीं, Loan Closure तब होता है जब उधारकर्ता पूरी लोन राशि का भुगतान करता है, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। इस प्रक्रिया में कोई माफी नहीं मिलती हैं, लेकिन लोन पूरी तरह से चुकता होने पर बैंक द्वारा एक No Objection Certificate (NOC) जारी किया जाता है, जो यह साबित करता है कि लोन चुका दिया गया है और अब वह समाप्त हो चुका है।
Loan Settlement और Loan Closure दोनों प्रक्रियाओं के बीच मुख्य अंतर यह है कि Loan Settlement में कुछ लोन माफ किया जाता है, जबकि Loan Closure में पूरी राशि का भुगतान किया जाता है। यदि आप अपनी पूरी उधारी चुकता करने की स्थिति में हैं, तो Loan Closure सबसे अच्छा विकल्प है, क्योंकि इससे आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर रहता है।
Que: क्या Loan Settlement करने से भविष्य में लोन लेने में दिक्कत होती है?
Ans: हां, Loan Settlement करने से आपकी क्रेडिट रिपोर्ट पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे भविष्य में आपको लोन प्राप्त करने में मुश्किल हो सकती है।
Que: Loan Closure के बाद CIBIL स्कोर पर क्या असर पड़ता है?
Ans: Loan Closure के बाद अगर आपने पूरी राशि चुकता की है, तो CIBIL स्कोर पर सकारात्मक असर पड़ता है, क्योंकि यह आपकी क्रेडिट जिम्मेदारी को दर्शाता है।
Que: क्या Loan Settlement के बाद बाकी का लोन कभी चुकता किया जा सकता है?
Ans: Loan Settlement के बाद, बैंक या लेंडिंग एजेंसी द्वारा माफ किया गया हिस्सा कभी नहीं चुकता किया जा सकता हैं। हालांकि, अगर आपके पास पैसे होते हैं, तो आप बाकी की राशि चुकता कर सकते हैं, लेकिन इससे पहले सेटलमेंट के समझौते को ध्यान में रखते हुए काम करना होगा।
Que: Loan Closure की प्रक्रिया कितने समय में पूरी होती है?
Ans: Loan Closure की प्रक्रिया आमतौर पर कुछ दिनों से लेकर एक सप्ताह तक पूरी हो सकती है, बशर्ते आप पूरी राशि का भुगतान कर चुके हों और बैंक से सभी दस्तावेज प्राप्त कर चुके हों।
Que: Loan Settlement का निर्णय लेने से पहले किन बातों पर विचार करें?
Ans: Loan Settlement का निर्णय लेने से पहले आपको अपनी वित्तीय स्थिति, बैंक के साथ समझौते के शर्तें, और इस प्रक्रिया के दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करना चाहिए। CIBIL स्कोर पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना भी जरूरी है।
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