Loan Settlement और Bankruptcy दोनों ही विकल्प उन लोगों के लिए होते हैं जो आर्थिक संकट में फंसे होते हैं और कर्ज चुका पाने में असमर्थ होते हैं। हालांकि, दोनों के उद्देश्य मिलते-जुलते हैं — यानी कर्ज से राहत पाना, लेकिन इनकी प्रक्रिया, प्रभाव और कानूनी स्थिति में स्पष्ट अंतर होता है।
सबसे पहले, Loan Settlement एक गैर-कानूनी (non-legal) प्रक्रिया होती है जिसमें बैंक और ग्राहक आपसी सहमति से लोन की राशि को घटाकर उसका निपटान करते हैं। इससे बैंक को आंशिक भुगतान तो मिल जाता है, लेकिन उधारकर्ता की CIBIL रिपोर्ट पर “Settled” टैग लग जाता है, जो भविष्य में लोन लेने में रुकावट पैदा कर सकता है।
दूसरी ओर, Bankruptcy एक कानूनी (legal) उपाय है जिसमें अदालत की भूमिका अहम होती है। इसमें व्यक्ति या कंपनी खुद को दिवालिया घोषित करती है और अदालत यह तय करती है कि उसकी संपत्ति को बेचकर कर्ज कैसे चुकाया जाएगा। हालांकि इससे उधारकर्ता को पूरे कर्ज से मुक्ति मिल सकती है, लेकिन इसका असर लंबे समय तक उसके वित्तीय भविष्य पर रहता है।
आज के समय में जब लोग तेजी से लोन लेते हैं—चाहे वह होम लोन हो, पर्सनल लोन हो या फिर क्रेडिट कार्ड से लिया गया कर्ज—तो कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है जब वह उसे चुकाने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे में उनके सामने दो विकल्प दिखाई देते हैं: Loan Settlement और Bankruptcy (दिवालियापन)। दोनों ही विकल्प एक वित्तीय संकट से बाहर निकलने के रास्ते माने जाते हैं, लेकिन दोनों की प्रक्रिया, परिणाम और प्रभाव बिल्कुल अलग – अलग होते हैं।
Loan Settlement, जैसा कि नाम से ही पता लगता है, एक ऐसा समझौता होता है जो कर्जदाता (बैंक या फाइनेंस कंपनी) और कर्ज लेने वाले व्यक्ति के बीच होता है। इसमें उधारकर्ता और बैंक इस बात पर सहमत होते हैं कि उधारकर्ता पूरा लोन न सही, लेकिन कुछ हिस्सा चुका दे और बाकी रकम को माफ कर दिया जाए।
वहीं दूसरी ओर, Bankruptcy, जिसे हिंदी में दिवालियापन कहा जाता है, एक कानूनी प्रक्रिया है। जब कोई व्यक्ति या कंपनी अपनी कुल संपत्ति और आमदनी के आधार पर यह साबित कर देती है कि वह किसी भी हालत में कर्ज चुकाने में सक्षम नहीं है, तो वह अदालत में दिवालियापन की याचिका दायर कर सकता है। इसके बाद अदालत सभी कर्जदाताओं को नोटिस भेजती है और एक जांच के बाद फैसला करती है कि कौन-कितना पैसा वसूल पाएगा और कितना कर्ज माफ किया जाएगा।
आज के इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि लोन सेटलमेंट और दिवालियापन की प्रक्रिया क्या होती है, उनके बीच प्रमुख अंतर कौन-कौन से हैं, और किन परिस्थितियों में कौन-सा विकल्प बेहतर माना जाता है।
जब कोई व्यक्ति या कंपनी इतनी ज्यादा आर्थिक परेशानी में आ जाती है कि वह अपने लिए लिए गए कर्ज या लोन को चुका पाने की स्थिति में नहीं रह जाती हैं, तो वह “Bankruptcy” यानी “दिवालियापन” की स्थिति में पहुँच जाती है। आसान भाषा में कहें तो जब आपकी आमदनी और संपत्ति, आपके कर्ज को चुकाने के लिए नाकाफी हो जाती है, तब आप दिवालिया घोषित हो सकते हैं।
इसके अलावा, जब कोई व्यक्ति खुद मान लेता है कि वह कर्ज चुकाने में असमर्थ है, तो वह अदालत में जाकर दिवालियापन की अर्जी दाखिल करता है। इसके बाद एक कानूनी प्रक्रिया शुरू होती है, जिसमें अदालत यह तय करती है कि उस व्यक्ति की संपत्ति को बेचकर कितने कर्जदाताओं को भुगतान किया जा सकता है। बाकी कर्जों को माफ भी किया जा सकता है।
यह एक ऐसी वित्तीय प्रक्रिया होती है जिसमें बैंक या वित्तीय संस्था लोन लेने वाले व्यक्ति को पूरी बकाया लोन की राशि को चुकाने के बजाय कम राशि देकर लोन निपटाने का मौका देती है। यह सुविधा उन लोगों के लिए होती है जो किसी कारण से अपना लोन समय पर नहीं चुका पाते हैं और लगातार डिफॉल्ट कर रहे होते हैं।
सेटलमेंट के तहत बैंक एकमुश्त राशि (लंपसम अमाउंट) पर सहमति बना सकता है, जिससे लोन बंद हो जाता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि Loan Settlement करने से आपका CIBIL स्कोर प्रभावित हो सकता है, जिससे भविष्य में आपको लोन लेने में मुश्किल हो सकती है। इसलिए, इसे अंतिम विकल्प के रूप में ही अपनाना चाहिए।
जब कोई व्यक्ति अपने पर्सनल लोन की EMI समय पर चुकाने में असमर्थ हो जाता है और लंबे समय तक बकाया राशि जमा हो जाती है, तो बैंक या वित्तीय संस्था Loan Settlement का विकल्प देती है। इसमें बैंक ग्राहक को पूरी बकाया राशि के बजाय रियायती रकम (discounted amount) चुकाने का मौका देता है, जिससे लोन का मामला निपट जाता है।
सेटलमेंट की प्रक्रिया में ग्राहक और बैंक के बीच बातचीत होती है, जहां बैंक इस बात की पुष्टि करता है कि ग्राहक लोन का पूरा भुगतान नहीं कर सकता हैं। इसके बाद, बैंक एक सिंगल-शॉट पेमेंट ऑफर देता है, जो आमतौर पर बकाया लोन राशि से कम होता है। जब ग्राहक इस सहमत राशि का भुगतान कर देता है, तो बैंक लोन को “Settled” के रूप में रिपोर्ट करता है। हालांकि, यह CIBIL स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है क्योंकि इसे “Complete Payment” नहीं माना जाता हैं।
इसलिए, Loan Settlement को अंतिम विकल्प के रूप में ही चुनना चाहिए और अगर संभव हो, तो लोन रीपेमेंट प्लान, लोन री-स्ट्रक्चरिंग या अन्य वित्तीय समाधान पर विचार करना चाहिए ताकि CIBIL Score खराब न हो।
निम्नलिखित दस्तावेजों की जरुरत होती हैं:
अगर आप इसे ऑनलाइन अप्लाई करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करें:
बैंक की वेबसाइट या ऐप पर जाएं
कस्टमर सपोर्ट सेक्शन देखें
सेटलमेंट करने के लिए रिक्वेस्ट फॉर्म भरें
जरूरी दस्तावेजो को अपलोड करें
सबमिट करें और बैंक की तरफ से जवाब आने का इंतजार करें
बैंक के ऑफर को समझें
भुगतान करें
हालांकि, Loan Settlement और Credit Card Loan Settlement दोनों का उद्देश्य कर्जदार को राहत देना होता है, लेकिन इनमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर भी होते हैं।
| अंतर के बिंदु | Loan Settlement | Credit Card Loan Settlement |
| प्रकार | किसी भी प्रकार के लोन (पर्सनल, होम, कार, एजुकेशन, आदि) का निपटारा | केवल क्रेडिट कार्ड के बकाया राशि का निपटारा |
| सेटलमेंट प्रक्रिया | बैंक एकमुश्त राशि को तय करता है, जिसे चुकाने पर लोन सेटल हो जाता है। | क्रेडिट कार्ड कंपनी एक तय की गई राशि पर समझौता करती है। |
| CIBIL स्कोर पर प्रभाव | CIBIL स्कोर 50-100 पॉइंट तक गिर सकता है और भविष्य में लोन लेना मुश्किल हो सकता है | CIBIL स्कोर पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है, और नए क्रेडिट कार्ड पाना मुश्किल हो सकता है। |
| भविष्य में लोन मिलने की संभावना | होम लोन, कार लोन या अन्य लोन प्राप्त करने में समस्या आ सकती है | क्रेडिट कार्ड कंपनियां कार्ड जारी करने से इनकार कर सकती हैं। |
Loan Settlement का आपके CIBIL स्कोर पर सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब कोई व्यक्ति किसी बैंक या NBFC से लोन लेता है और किसी कारणवश पूरी राशि चुकाने में असमर्थ होता है, तो बैंक उसे एक समझौता करने का मौका देता है, जिसे Loan Settlement कहा जाता है।
हालांकि, Loan Settlement और Loan Closure में बहुत बड़ा अंतर होता है। अगर आप अपने लोन की पूरी राशि चुकाकर उसे बंद करते हैं, तो यह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में “Closed” के रूप में दर्ज होता है, जिससे आपका CIBIL स्कोर बेहतर होता है। लेकिन अगर आपने लोन की कुछ राशि बैंक के साथ समझौते के तहत माफ करवा ली है, तो इसे “Settled” के रूप में रिपोर्ट किया जाता है, जो आपके क्रेडिट स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है।
अगर आपने लोन सेटल कर लिया है और अब CIBIL स्कोर सुधारना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कदम उठा सकते हैं:
यहां कुछ जरुरी बिंदुओं पर ध्यान देने की जरुरत है, जो आपको सही Loan Settlement सर्विस चुनने में मदद करेंगे:
सर्विस प्रदाता की प्रमाणिकता को चेक करें
सेटलमेंट की सर्विस को लेने से पहले, यह सुनिश्चित करें कि जिस सर्विस प्रदाता से आप मदद ले रहे हैं, वह वित्तीय संस्थाओं और बैंकों के साथ रजिस्टर्ड और प्रमाणित हो। एक भरोसेमंद सर्विस प्रदाता ही आपको सही मार्गदर्शन और सहायता प्रदान कर सकता है। ऑनलाइन रिव्यू और ग्राहक की फीडबैक देखना एक अच्छा तरीका हो सकता है।
सेवा शुल्क और अन्य खर्चों की भी जांच करें
कई सर्विस प्रदाता सेवा शुल्क भी लेते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि शुल्क ज्यादा न हो और कोई छिपे हुए खर्च न हों। सर्विस प्रदाता से पहले से समझौता करें कि कौन सी सेवाएं मुफ्त हैं और किनके लिए आपको अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
सेटलमेंट प्रक्रिया को समझें
सर्विस प्रदाता द्वारा दी जाने वाली सेटलमेंट की प्रक्रिया को ध्यान से समझें। क्या वे आपकी पूरी स्थिति को समझते हैं और बैंक के साथ बातचीत करने के लिए आपको बेहतर समाधान प्रदान करते हैं? एक अच्छा प्रदाता आपको कागजात और प्रक्रिया से पूरी जानकारी देगा, ताकि आप पूरी प्रक्रिया को सही तरीके से समझ सकें।
हमारी सेवा के साथ जुड़े
अगर आप भी कर्ज के जाल में फंस गए हैं और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और Loan Settlement का रास्ता अपनाना चाहते है तो आप हमारी Loan Settlement की सेवा के लिए आवेदन कर सकते हैं। हम आपके लोन का सेटलमेंट करने में आपकी सहयता कर्नेगे। इसके साथ ही हम आपको 6 – 8 महीने के अंदर लोन के बोझ से राहत प्रदान करवाते हैं। अगर आपको हमारी सेवा के बारे में और ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी हैं तो आप हमें सपर्क कर सकते हैं।
सेटलमेंट की प्रक्रिया का समय अलग – अलग कारकों पर भी निर्भर करता है, जैसे आपके बैंक या लोन देने वाली संस्था की पॉलिसी, बकाया राशि, और आप दोनों के बीच बातचीत। आमतौर पर यह प्रक्रिया 1 से 3 महीने तक का समय ले सकती है।
सेटलमेंट की प्रक्रिया में सबसे पहला कदम बैंक से बातचीत करना होता है, जहां आप अपनी मुश्किलों और भुगतान की स्थिति के बारें में बैंक को समझाते हैं। इसके बाद, बैंक आपकी स्थिति के आधार पर एक सेटलमेंट का ऑफर देता है। अगर आप उस ऑफर को स्वीकार करते हैं, तो बैंक को तय समय सीमा के भीतर भुगतान करना होता है। फिर बैंक लोन को सेटल के रूप में रिपोर्ट करता है, जो कुछ समय ले सकता है।
इस पूरी प्रक्रिया में जितना ज्यादा समय लगेगा, उतना ही आपके CIBIL स्कोर पर प्रभाव डाल सकता है, इसलिए जल्दी से जल्दी समाधान तलाशना बेहतर रहता है।
अगर आपने किसी बैंक से पर्सनल लोन लिया है और किसी कारणवश उसे पूरी तरह चुकाने में असमर्थ होते हैं, तो Loan Settlement आपके लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। Loan Settlement का मतलब होता है कि बैंक और उधारकर्ता (लोन लेने वाला व्यक्ति) के बीच एक समझौता होता है, जिसमें बैंक ब्याज या पेनल्टी को कम करके एक निश्चित राशि पर लोन निपटाने के लिए सहमत हो जाता है। जब Loan Settlement पूरा हो जाता है, तो बैंक एक Loan Settlement Letter जारी करता है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि लोनदाता और बैंक के बीच समझौता हुआ है और अब उधारकर्ता पर कोई बकाया नहीं है।
आइए आसान भाषा में इनके बीच का फर्क समझते हैं:
1. परिभाषा (Definition)
2. प्रक्रिया (Process)
3. कर्ज से छुटकारा (Debt Relief)
4. CIBIL स्कोर पर असर
5. लागत और समय (Cost & Time)
इसके निम्नलिखित फायदे और नुकसान होते हैं:
फायदे
नुक्सान
नीचे हम विस्तार से जानेंगे कि यह कैसे किया जा सकता है।
1. सबसे पहले बैंक से संपर्क करें
2. OTS (One-Time Settlement) का प्रस्ताव मांगे
3. सेटलमेंट की डील को लिखित में लें (Settlement Letter/NOC)
4. CIBIL स्कोर पर असर को समझें
5. भविष्य में पुनः डिफॉल्ट से बचें
Loan Settlement और Bankruptcy, दोनों ही आर्थिक संकट की स्थितियों से बाहर निकलने के बेहतर उपाय हैं, लेकिन इनकी प्रक्रिया, प्रभाव और कानूनी स्थिति बिल्कुल अलग होती है। जहाँ एक ओर Loan Settlement एक आपसी समझौता होता है, वहीं Bankruptcy एक कानूनी प्रक्रिया होती है जिसमें कोर्ट की भूमिका होती है।
सबसे पहले, यह समझना जरूरी है कि Loan Settlement तभी किया जाता है जब उधारकर्ता बैंक को यह भरोसा दिलाता है कि वह पूरी रकम नहीं चुका सकता हैं लेकिन कुछ हिस्सा देने को तैयार है। इससे बैंक को कुछ नुकसान जरूर होता है, पर वह लोन पूरी तरह बर्बाद होने से बचा लेता है। इसके साही ही, Bankruptcy में व्यक्ति या संस्था यह स्पष्ट रूप से अदालत में घोषित करती है कि वह अपनी कुल देनदारियाँ चुकाने में असमर्थ है और उसे पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत चाहिए।
इसके अलावा, इन दोनों के प्रभाव भी अलग-अलग होते हैं। Loan Settlement से आपका CIBIL स्कोर खराब होता है, लेकिन आप भविष्य में धीरे-धीरे अपनी क्रेडिट हिस्ट्री सुधार सकते हैं। जबकि Bankruptcy का असर अधिक गहरा और दीर्घकालिक होता है, जिससे आगे लोन या क्रेडिट सुविधा पाना मुश्किल हो सकता है।
Que: Loan Settlement और लोन रिपेमेंट में क्या अंतर है?
Ans: लोन रिपेमेंट का मतलब है पूरे लोन और ब्याज की तय रकम समय पर चुकाना। Loan Settlement का मतलब है कि बैंक कुछ राशि माफ कर देता है और बाकी रकम लेकर खाता बंद कर देता है।
Que: क्या Loan Settlement करने से CIBIL स्कोर पर असर पड़ता है?
Ans: हां, Loan Settlement को CIBIL रिपोर्ट में “Settled” के रूप में दिखाया जाता है, जो भविष्य में आपकी क्रेडिट योग्यता को प्रभावित कर सकता है। इससे स्कोर घट सकता है।
Que: OTS (One Time Settlement) स्कीम क्या है?
Ans: OTS एक ऐसी योजना होती है जिसमें बैंक उधारकर्ता को एक निश्चित राशि एकमुश्त (या निर्धारित किश्तों में) चुकाकर लोन से मुक्त होने का मौका देता है। इसमें कुछ ब्याज या मूलधन माफ किया जा सकता है।
Que: NPA क्या होता है?
Ans: NPA का मतलब होता है Non-Performing Asset, यानी ऐसा लोन जिसकी EMI या ब्याज की किश्तें 90 दिनों (3 महीने) से ज्यादा समय तक नहीं चुकाई गई हैं। ऐसे लोन को बैंक “बुरा लोन” मानते हैं और NPA घोषित कर देते हैं।
Que: क्या NPA घोषित होने के बाद भी लोन चुकाया जा सकता है?
Ans: हां, NPA घोषित होने के बाद भी लोन चुकाया जा सकता है। इसके लिए आप बैंक से संपर्क कर One Time Settlement (OTS) या किश्तो में भुगतान करने की व्यवस्था कर सकते हैं।
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