Loan Settlement तब होता है जब उधारकर्ता पूरा लोन नहीं चुका पाता हैं और बैंक उससे कम रकम लेकर लोन बंद कर देता है। इस प्रक्रिया में लोन का कुछ हिस्सा माफ़ कर दिया जाता है, जिसे Forgiven Amount कहते हैं। अब सवाल उठता है कि क्या इस माफ़ की गई राशि पर Income Tax लगती है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि टैक्स लागू होने का निर्णय इस बात पर निर्भर करता है कि लोन किस उद्देश्य से लिया गया था। उदाहरण के लिए, अगर पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का कुछ हिस्सा माफ़ हुआ है, तो यह राशि Income Tax के तहत टैक्सेबल आय मानी जा सकती है। वहीं, अगर लोन बिज़नेस के लिए था, तो माफ़ की गई रकम को बिज़नेस इनकम के तौर पर गिना जाता है और उस पर टैक्स लग सकता है।
इसके अलावा, Income Tax Act की Section 28(iv) में साफ़ लिखा है कि कोई भी माफ़ की गई राशि, जो फायदे के रूप में मिले, उस पर टैक्स देना जरूरी होता है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में जैसे दिवालियापन केस या सरकारी कृषि लोन माफी में टैक्स नहीं लगता हैं।
आज के समय में लोन लेना बहुत आम बात हो गई है। चाहे घर खरीदना हो, गाड़ी लेनी हो, बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे चाहिए हों या फिर बिज़नेस को आगे बढ़ाना हो – हर जरूरत के लिए अलग-अलग प्रकार के लोन उपलब्ध हैं। परंतु जब समय पर EMI नहीं भर पाते हैं, तो वही लोन एक बोझ बन जाता है। कई बार लोग ऐसी स्थिति में पहुंच जाते हैं जहाँ वे पूरा लोन चुकाने में असमर्थ होते हैं। ऐसे में बैंक या फाइनेंशियल संस्था से Loan Settlement का विकल्प अपनाया जाता है।
Loan Settlement का मतलब होता है कि उधारकर्ता (Borrower) और बैंक आपसी सहमति से लोन की कुछ रकम को माफ़ कर देते हैं, और तय की गई कुछ राशि का भुगतान कर के लोन को बंद कर दिया जाता है। यह एक तरह का समझौता होता है, जहाँ पूरा कर्ज नहीं चुकाया जाता हैं, बल्कि एक निश्चित रकम देकर लोन का खाता बंद कर दिया जाता है।
अब सवाल यह उठता है कि जब बैंक कुछ कर्ज माफ़ कर देता है, तो क्या उस माफ़ की गई राशि पर Income Tax लगता है? क्या इससे आपकी टैक्स देनदारी बढ़ जाती है? क्या यह राशि इनकम मानी जाती है? और क्या इसे माफ़ किया गया लाभ (Forgiven Amount) मानकर टैक्स देना होता है?
यहीं से असली भ्रम की शुरुआत होती है। बहुत से लोग यह मानते हैं कि Settlement के बाद राहत मिलती है, लेकिन सच्चाई यह है कि Income Tax के नियम इस पर नजर बनाए रखते हैं। खासकर अगर आपने कोई पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड लोन लिया है और उसका कुछ हिस्सा माफ़ हुआ है, तो टैक्स विभाग यह जानने की कोशिश करता है कि वह माफ़ की गई राशि आपकी आय में तो नहीं आती।
यह एक ऐसी वित्तीय प्रक्रिया होती है जिसमें बैंक या वित्तीय संस्था लोन लेने वाले व्यक्ति को पूरी बकाया लोन की राशि को चुकाने के बजाय कम राशि देकर लोन निपटाने का मौका देती है। यह सुविधा उन लोगों के लिए होती है जो किसी कारण से अपना लोन समय पर नहीं चुका पाते हैं और लगातार डिफॉल्ट कर रहे होते हैं।
सेटलमेंट के तहत बैंक एकमुश्त राशि (लंपसम अमाउंट) पर सहमति बना सकता है, जिससे लोन बंद हो जाता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि Loan Settlement करने से आपका CIBIL Score प्रभावित हो सकता है, जिससे भविष्य में आपको लोन लेने में मुश्किल हो सकती है। इसलिए, इसे अंतिम विकल्प के रूप में ही अपनाना चाहिए।
हालांकि, Loan Settlement और Credit Card Loan Settlement दोनों का उद्देश्य कर्जदार को राहत देना होता है, लेकिन इनमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर भी होते हैं।
| अंतर के बिंदु | Loan Settlement | Credit Card Loan Settlement |
| प्रकार | किसी भी प्रकार के लोन (पर्सनल, होम, कार, एजुकेशन, आदि) का निपटारा | केवल क्रेडिट कार्ड के बकाया राशि का निपटारा |
| सेटलमेंट प्रक्रिया | बैंक एकमुश्त राशि को तय करता है, जिसे चुकाने पर लोन सेटल हो जाता है। | क्रेडिट कार्ड कंपनी एक तय की गई राशि पर समझौता करती है। |
| CIBIL Score पर प्रभाव | CIBIL Score 50-100 पॉइंट तक गिर सकता है और भविष्य में लोन लेना मुश्किल हो सकता है | CIBIL Score पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है, और नए क्रेडिट कार्ड पाना मुश्किल हो सकता है। |
| भविष्य में लोन मिलने की संभावना | होम लोन, कार लोन या अन्य लोन प्राप्त करने में समस्या आ सकती है | क्रेडिट कार्ड कंपनियां कार्ड जारी करने से इनकार कर सकती हैं। |
निम्नलिखित दस्तावेजों की जरुरत होती हैं:
अगर आप इसे ऑनलाइन अप्लाई करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करें:
बैंक की वेबसाइट या ऐप पर जाएं
कस्टमर सपोर्ट सेक्शन देखें
सेटलमेंट करने के लिए रिक्वेस्ट फॉर्म भरें
जरूरी दस्तावेजो को अपलोड करें
सबमिट करें और बैंक की तरफ से जवाब आने का इंतजार करें
बैंक के ऑफर को समझें
भुगतान करें
Loan Settlement का आपके CIBIL Score पर सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब कोई व्यक्ति किसी बैंक या NBFC से लोन लेता है और किसी कारणवश पूरी राशि चुकाने में असमर्थ होता है, तो बैंक उसे एक समझौता करने का मौका देता है, जिसे Loan Settlement कहा जाता है।
हालांकि, Loan Settlement और Loan Closure में बहुत बड़ा अंतर होता है। अगर आप अपने लोन की पूरी राशि चुकाकर उसे बंद करते हैं, तो यह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में “Closed” के रूप में दर्ज होता है, जिससे आपका CIBIL Score बेहतर होता है। लेकिन अगर आपने लोन की कुछ राशि बैंक के साथ समझौते के तहत माफ करवा ली है, तो इसे “Settled” के रूप में रिपोर्ट किया जाता है, जो आपके क्रेडिट स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है।
अगर आपने लोन सेटल कर लिया है और अब CIBIL Score सुधारना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कदम उठा सकते हैं:
सेटलमेंट की प्रक्रिया का समय अलग – अलग कारकों पर भी निर्भर करता है, जैसे आपके बैंक या लोन देने वाली संस्था की पॉलिसी, बकाया राशि, और आप दोनों के बीच बातचीत। आमतौर पर यह प्रक्रिया 1 से 3 महीने तक का समय ले सकती है।
सेटलमेंट की प्रक्रिया में सबसे पहला कदम बैंक से बातचीत करना होता है, जहां आप अपनी मुश्किलों और भुगतान की स्थिति के बारें में बैंक को समझाते हैं। इसके बाद, बैंक आपकी स्थिति के आधार पर एक सेटलमेंट का ऑफर देता है। अगर आप उस ऑफर को स्वीकार करते हैं, तो बैंक को तय समय सीमा के भीतर भुगतान करना होता है। फिर बैंक लोन को सेटल के रूप में रिपोर्ट करता है, जो कुछ समय ले सकता है।
इस पूरी प्रक्रिया में जितना ज्यादा समय लगेगा, उतना ही आपके CIBIL Score पर प्रभाव डाल सकता है, इसलिए जल्दी से जल्दी समाधान तलाशना बेहतर रहता है।
आइए आसान भाषा में जानें कि आप Loan Settlement के बाद NOC कैसे प्राप्त कर सकते हैं।
1. सबसे पहले – Settlement की पुष्टि प्राप्त करें
सबसे पहले, जब भी आप लोन का सेटलमेंट करते हैं, तो उस पर बैंक या फाइनेंशियल संस्था से एक लिखित सेटलमेंट लेटर जरूर लें। यह लेटर इस बात का प्रमाण होता है कि आपने तय की गई राशि चुका दी है और बैंक ने इसे स्वीकार कर लिया है।
2. इसके बाद – NOC के लिए आवेदन करें
सेटलमेंट लेटर प्राप्त करने के बाद अगला कदम होता है बैंक से NOC की मांग करना। इसके लिए आप बैंक को एक औपचारिक पत्र या ईमेल लिख सकते हैं जिसमें आप NOC जारी करने का अनुरोध करें।
3. साथ ही – सभी दस्तावेज अटैच करें
जब आप आवेदन भेजते हैं, तो उसमें नीचे दिए गए दस्तावेज़ अटैच करना न भूलें:
4. फिर – बैंक से फॉलोअप करें
कई बार बैंक NOC भेजने में देर कर सकता है। ऐसे में, आपको 7-10 दिनों के अंदर बैंक से संपर्क करके फॉलोअप करना चाहिए। आप फोन कॉल, ईमेल या शाखा में जाकर स्थिति की जानकारी ले सकते हैं।
5. एक बार जब NOC मिल जाए – ध्यान से जांचें
जैसे ही आपको NOC मिल जाए, ध्यान से इसकी जांच करें। यह सुनिश्चित करें कि इसमें निम्नलिखित जानकारी सही है:
इसके निम्नलिखित फायदे और नुकसान होते हैं:
फायदे
नुक्सान
Loan Settlement एक ऐसा विकल्प होता है जो तब सामने आता है जब कोई कर्जदार (borrower) लोन की EMI को चुकाने में असमर्थ होता है। ऐसे में बैंक या वित्तीय संस्थान ग्राहक को एक मौका देता है कि वह एक तय राशि देकर लोन को ‘सेटल’ कर ले, यानी बाकी बची रकम को माफ कर दिया जाए। यह विकल्प सुनने में भले ही आसान लगे, लेकिन इसके पीछे कई जरुरी बातें होती हैं, जिन पर सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए।
1. गंभीर आर्थिक संकट में:
अगर आपकी नौकरी चली गई है, गंभीर बीमारी हो गई है या कोई ऐसी परिस्थिति आ गई है जहां आपकी आय पूरी तरह रुक गई है, तो Loan Settlement एक आपातकालीन समाधान साबित हो सकता है।
2. जब कोई अन्य विकल्प नहीं बचा हो:
अगर आप लोन रिस्ट्रक्चरिंग, ईएमआई में राहत या भुगतान की समयसीमा बढ़ाने जैसे अन्य उपाय आजमा चुके हैं और फिर भी लोन चुकाना संभव नहीं है, तो यह विकल्प अपनाया जा सकता है।
1. CIBIL स्कोर पर बुरा असर:
Loan Settlement करने के बाद क्रेडिट रिपोर्ट में “Settled” स्टेटस लिखा जाता है, जो बताता है कि आपने पूरा लोन नहीं चुकाया। यह भविष्य में लोन या क्रेडिट कार्ड लेने में दिक्कत पैदा कर सकता है।
2. भविष्य में लोन रिजेक्शन:
बैंक आपको अगली बार लोन देने में झिझक सकते हैं क्योंकि उन्हें आप पर भरोसा नहीं रहेगा कि आप पूरा भुगतान कर पाएंगे।
3. कानूनी जोखिम भी हो सकता है:
कुछ मामलों में बैंक सेटलमेंट के बाद भी कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं, खासकर जब सही तरीके से समझौता नहीं हुआ हो।
वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि Loan Settlement को अंतिम विकल्प की तरह देखा जाना चाहिए। अगर संभव हो तो पहले अपने बैंक से बात करें, नई भुगतान योजना बनवाएं, या कुछ समय की राहत लें। Settlement तभी करें जब आपके पास कोई अन्य विकल्प न हो और स्थिति सच में गंभीर हो।
आइए इसे विस्तार से और आसान भाषा में समझते हैं।
हाँ, कई मामलों में यह माफ़ की गई राशि Income Tax के दायरे में आ सकती है। इसका निर्धारण इस बात पर होता है कि:
लोन किस उद्देश्य से लिया गया था:
Loan Waiver कौन देता है:
अगर बैंक या वित्तीय संस्था माफ़ी देती है, और वह माफ़ी ₹10,000 से ज़्यादा है, तो उस पर Section 56(2) और Section 28(iv) के तहत टैक्स बन सकता है।
Income Tax Act की Section 28(iv) कहती है कि अगर किसी बिज़नेस को कोई फायदा नकद (cash) के अलावा किसी और रूप में मिलता है, तो वह भी टैक्स के दायरे में आएगा। यानी अगर लोन माफ़ किया गया है, तो वह बिज़नेस लाभ के तौर पर गिना जा सकता है।
कुछ मामलों में Loan Settlement पर टैक्स नहीं लगता, जैसे:
अगर बैंक ने Loan Settlement के बाद फॉर्म 16A या TDS काटा है, तो उसकी एंट्री Form 26AS में दिख सकती है। ऐसी स्थिति में उसे Income Tax Return (ITR) में दिखाना ज़रूरी हो जाता है।
आइए विस्तार से जानते हैं कि RBI के नए नियम क्या हैं और ये आपके लिए क्यों जरूरी हैं:
1. सेटलमेंट ऑफर देना अब एक पॉलिसी के तहत होगा
RBI ने निर्देश दिए हैं कि बैंक और NBFC (Non-Banking Financial Companies) अब सेटलमेंट ऑफर या वाइऑफराइट ऑफर (Waiver Offer) केवल अपनी आंतरिक पॉलिसी के तहत ही दे सकते हैं। इसका मतलब यह है कि कोई भी सेटलमेंट या डिस्काउंट बिना लिखित नीति के नहीं दिया जा सकता हैं।
2. बोर्ड-अप्रूव्ड पॉलिसी जरूरी
बैंक को एक सही और पारदर्शी Settlement और Write-Off Policy बनानी होगी, जिसे उनके बोर्ड द्वारा मंजूरी दी गई हो। इस नीति में यह भी बताया जाना चाहिए कि किन मामलों में सेटलमेंट दिया जाएगा और किन मामलों में नहीं।
3. ग्राहक को पूरी जानकारी देना अनिवार्य
सेटलमेंट या वाइऑफराइट की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ग्राहक को लिखित रूप में पूरी जानकारी देना जरूरी है:
4. CIBIL रिपोर्टिंग में पारदर्शिता
अगर किसी ग्राहक ने लोन या क्रेडिट कार्ड सेटलमेंट कर लिया है, तो बैंक को यह बात क्रेडिट ब्यूरो (जैसे CIBIL) को सही रूप में रिपोर्ट करनी होगी।
उदाहरण: अगर किसी अकाउंट का सेटलमेंट हुआ है, तो उसे “Settled” के रूप में दिखाना होगा, “Closed” या “Paid” नहीं।
5. रिकवरी एजेंट्स के लिए दिशा-निर्देश
RBI ने यह भी कहा है कि रिकवरी एजेंट्स को भेजने से पहले ग्राहक को पूरी जानकारी दी जाए। साथ ही, एजेंट्स की पहचान, समय, तारीख आदि का पूरा रिकॉर्ड होना चाहिए।
6. Settlement या Write-Off का Proper Approval जरूरी
कोई भी सेटलमेंट या Write-Off तभी मान्य होगा जब:
आखिर में, जब हम Loan Settlement और Income Tax के बीच के संबंध को ध्यान से समझते हैं, तो यह साफ़ हो जाता है कि यह विषय जितना आसान दिखता है, असलियत में उतना ही पेचीदा भी होता है। सबसे पहले, यह जानना जरूरी है कि लोन सैटलमेंट का मतलब सिर्फ यह नहीं होता हैं कि बैंक ने आपको राहत दे दी और मामला खत्म हो गया। इसके बाद भी कई आर्थिक और कर संबंधी प्रभाव होते हैं, जिन पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते हैं।
इसके अलावा, जब बैंक किसी व्यक्ति का लोन आंशिक रूप से माफ करता है, तो उस माफ़ की गई राशि को टैक्स विभाग “आय” के रूप में देख सकता है, खासकर तब जब वह रकम बड़ी हो। इस स्थिति में, अगर आपने पर्सनल लोन लिया है या कोई क्रेडिट कार्ड बकाया था और वह माफ़ किया गया है, तो उस पर टैक्स बन सकता है। इसी तरह, अगर आपने बिज़नेस के लिए लोन लिया है और उसका कुछ हिस्सा माफ़ हुआ है, तो वह आपके व्यापारिक फायदे के रूप में गिना जा सकता है।
इसके साथ ही, हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि सभी लोन सैटलमेंट पर टैक्स नहीं लगता। उदाहरण के तौर पर, अगर यह माफ़ी इंसोल्वेंसी (दिवालियापन), कोर्ट के आदेश या सरकार की किसी विशेष योजना के अंतर्गत हुई है – जैसे कि किसानों के कृषि लोन माफ किए जाना – तो ऐसे मामलों में टैक्स छूट दी जाती है। यानी, हर स्थिति में यह जरूरी नहीं है कि माफ़ की गई रकम पर आपको टैक्स भरना ही पड़े।
Que: Loan Settlement के बाद NOC कब मिलती है?
Ans: Loan Settlement के बाद बैंक से NOC प्राप्त करने में आमतौर पर 7 से 10 दिन का समय लगता है।
Que: क्या सभी बैंक Loan Settlement का विकल्प देते हैं?
Ans: नहीं, सभी बैंक Loan Settlement का विकल्प नहीं देते हैं। यह बैंक की नीति और आपके लोन की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ बैंक इसे “Last Resort” (अंतिम उपाय) के रूप में ही इस्तेमाल करते हैं।
Que: क्या Loan Settlement के बाद मुझे क्रेडिट कार्ड मिल सकता है?
Ans: यह मुश्किल हो सकता है क्योंकि बैंक Settlement को नेगेटिव मार्क मानते हैं। हालांकि, आप सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड (Fixed Deposit के आधार पर मिलने वाला कार्ड) ले सकते हैं और धीरे-धीरे अपनी क्रेडिट हिस्ट्री सुधार सकते हैं।
Que: क्या मैं Loan Settlement को CIBIL रिपोर्ट से हटवा सकता हूँ?
Ans: सामान्य तौर पर Loan Settlement की एंट्री हटवाई नहीं जा सकती हैं, लेकिन आप बैंक से बातचीत करके इसे “Closed” में बदलवाने की कोशिश कर सकते हैं, जिसके लिए आपको बाकी की राशि चुकानी पड़ सकती है।
Que: क्या Credit Card Loan Settlement और Loan Settlement का प्रभाव अलग-अलग होता है?
Ans: हाँ, Credit Card Loan Settlement का प्रभाव ज्यादा बुरा हो सकता है क्योंकि क्रेडिट कार्ड कंपनियां इसे गंभीरता से लेती हैं और भविष्य में नए क्रेडिट कार्ड जारी करने से मना कर सकती हैं।
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