Loan Consultant वह वित्तीय सलाहकार होता है जो आपके लिए सही लोन चुनने, कम ब्याज दर दिलवाने और तेज़ अप्रूवल सुनिश्चित करने में मदद करता है। आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोग विभिन्न ज़रूरतों – जैसे घर खरीदना, मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई, या बिजनेस विस्तार – के लिए लोन लेना चाहते हैं। लेकिन लोन की प्रक्रिया काफी जटिल और भ्रमित करने वाली हो सकती है। ऐसे में एक अनुभवी Loan Consultant आपके लिए एक मार्गदर्शक की तरह काम करता है, जो न सिर्फ समय और मेहनत बचाता है, बल्कि आपको फाइनेंशियल नुकसान से भी सुरक्षित रखता है।
एक अच्छा कंसल्टेंट आपकी जरूरत, सैलरी, CIBIL स्कोर और भुगतान क्षमता को ध्यान में रखकर आपके लिए सबसे बेहतर बैंक और स्कीम सुझाता है। वह दस्तावेजों की तैयारी में भी मदद करता है और यह सुनिश्चित करता है कि लोन जल्दी से अप्रूव हो। इसके अलावा, वह यह भी बताता है कि EMI कितनी होगी, ब्याज दर क्या होगी और क्या छिपे हुए चार्जेस हैं या नहीं। यही वजह है कि आजकल लोग "Loan Consultant Near Me" जैसे शब्द Google पर खोजते हैं ताकि उन्हें अपने क्षेत्र में कोई भरोसेमंद सलाहकार मिल सके।
हालांकि, हर लोन कंसल्टेंट भरोसेमंद नहीं होता। इसलिए किसी को चुनने से पहले उसके अनुभव, ग्राहक समीक्षा, बैंक से संबंध और पारदर्शिता को जांचना बहुत जरूरी है। सही सलाहकार आपके लोन प्रोसेस को आसान और सुरक्षित बना सकता है।
आज के समय में जब हर कोई अपने सपनों को पूरा करना चाहता है—चाहे वो घर खरीदना हो, गाड़ी लेना हो, बच्चों की पढ़ाई या किसी इमरजेंसी का खर्च—तो सबसे आसान रास्ता होता है लोन लेना। लेकिन लोन लेना जितना आसान दिखता है, असल में उतना ही पेचीदा हो सकता है। कई बार हमें यह समझ नहीं आता हैं कि किस बैंक से लोन लें, कौन सी स्कीम बेहतर है, ब्याज दर क्या होगी, डॉक्युमेंट्स क्या लगेंगे, और अप्रूवल में कितना समय लगेगा। ऐसे में एक भरोसेमंद और अनुभवी Loan Consultant हमारी इस यात्रा को आसान बना सकता है।
एक अच्छे Loan Consultant का काम सिर्फ लोन दिलवाना नहीं होता हैं, बल्कि आपको सही दिशा में मार्गदर्शन देना होता है। वो आपकी ज़रूरत, आपकी सैलरी, CIBIL स्कोर और भुगतान क्षमता के आधार पर आपको सबसे बेहतर विकल्प सुझाते हैं। इससे न सिर्फ आपका समय बचता है, बल्कि आप अनजाने में कोई गलत निर्णय लेने से भी बचते हैं।
आजकल मार्केट में कई तरह के लोन उपलब्ध हैं – पर्सनल लोन, होम लोन, एजुकेशन लोन, कार लोन और बिज़नेस लोन आदि। हर लोन की शर्तें अलग होती हैं। अगर कोई एक्सपर्ट आपके साथ हो, तो आप न सिर्फ कम ब्याज दर पर लोन पा सकते हैं, बल्कि लोन का अप्रूवल भी बहुत जल्दी हो जाता है। यही वजह है कि आजकल लोग Google पर “Loan Consultant Near Me” सर्च करते हैं, ताकि उन्हें नजदीक ही कोई भरोसेमंद सलाहकार मिल जाए।
एक अनुभवी लोन कंसल्टेंट आपकी CIBIL Report की जांच करता है, और अगर उसमें कोई दिक्कत हो, तो उसका हल भी बताता है। कई बार लोग गलती से गलत बैंक या गलत स्कीम चुन लेते हैं, जिससे उन्हें ज्यादा ब्याज देना पड़ता है या लोन रिजेक्ट हो जाता है। लेकिन एक काबिल कंसल्टेंट इन सभी गलतियों से आपको बचाता है।
Loan Consultant (लोन कंसल्टेंट) एक ऐसा पेशेवर होता है जो लोगों को उनके वित्तीय ज़रूरतों के अनुसार सही लोन चुनने और पाने में मदद करता है। जब कोई व्यक्ति पर्सनल लोन, होम लोन, एजुकेशन लोन, कार लोन या बिजनेस लोन लेना चाहता है, तो Loan Consultant उसे पूरी प्रक्रिया समझाता है, विकल्पों की तुलना करता है और सबसे उपयुक्त योजना (loan scheme) चुनने में मार्गदर्शन करता है।
Loan Consultant सबसे पहले आपकी आर्थिक ज़रूरतों और लक्ष्य को समझता है – जैसे कि आपको कितनी राशि चाहिए, कितने समय के लिए चाहिए, और आप कितनी EMI चुका सकते हैं।
भारत में कई बैंक और NBFC (Non-Banking Financial Companies) लोन देते हैं। सभी की ब्याज दरें और शर्तें अलग होती हैं। एक Loan Consultant इन सभी विकल्पों की तुलना कर के आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प निकालता है।
Loan Consultant अपने अनुभव और नेटवर्क की मदद से आपको उस बैंक या संस्था से लोन दिलवाने में मदद करता है जहाँ ब्याज दर कम हो और सामान्य शर्तों में लोन मिल सके।
लोन लेते समय कई डॉक्युमेंट्स की जरूरत होती है – जैसे कि पैन कार्ड, आधार कार्ड, इनकम प्रूफ, बैंक स्टेटमेंट आदि। Loan Consultant आपको यह बताता है कि कौन-कौन से डॉक्युमेंट्स लगेंगे और उन्हें कैसे तैयार करें।
कई बार लोन की प्रक्रिया बहुत धीमी होती है, लेकिन एक अच्छा Loan Consultant आपको सही प्रक्रिया और सही चैनल के ज़रिए फास्ट अप्रूवल दिलवा सकता है।
यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बिंदु दिए गए हैं जो आपको एक अच्छे Loan Consultant चुनने में मदद करेंगे:
1. अनुभव और एक्सपर्ट्स देखें
कंसल्टेंट को लोन इंडस्ट्री में कम से कम कुछ सालो का अनुभव होना चाहिए।
क्या वो पर्सनल लोन, होम लोन, बिजनेस लोन आदि सभी मामलों में निपुण है?
क्या उन्होंने पहले ऐसे केस हैंडल किए हैं जो आपकी स्थिति जैसे हों?
2. ग्राहक रिव्यू और फीडबैक पढ़ें
Google, JustDial या Facebook जैसे प्लेटफॉर्म पर उनके पिछले ग्राहकों के रिव्यू पढ़ें।
अगर ज़्यादातर लोग संतुष्ट हैं, तो यह एक अच्छा संकेत है।
3. लाइसेंस या बैंक से जुड़ाव
अच्छे Loan Consultant आम तौर पर किसी बैंक या NBFC के ऑथराइज्ड DSA (Direct Selling Agent) होते हैं।
उनसे पूछें कि क्या वे किसी बैंक के अप्रूव्ड एजेंट हैं।
अगर वे फ्रीलांसर हैं, तब भी उनसे proper पहचान पत्र और प्रोफाइल मांगें।
4. ब्याज दर और चार्जेस को स्पष्ट करें
एक भरोसेमंद कंसल्टेंट आपसे कोई छुपा हुआ चार्ज नहीं लेगा।
पूछें कि वे अपनी सर्विस के लिए कोई शुल्क लेंगे या नहीं।
वह आपको साफ-साफ बताए कि किस बैंक में कितनी ब्याज दर लगेगी।
5. प्रोसेसिंग टाइम और डॉक्युमेंट गाइडेंस दें या नहीं
सही कंसल्टेंट आपको पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में समझाएगा।
वह बताएगा कि कौन से डॉक्यूमेंट लगेंगे और उन्हें कैसे तैयार करें।
वो आपको लोन अप्रूवल के समय और प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी देगा।
यह एक ऐसी वित्तीय प्रक्रिया होती है जिसमें बैंक या वित्तीय संस्था लोन लेने वाले व्यक्ति को पूरी बकाया लोन की राशि को चुकाने के बजाय कम राशि देकर लोन निपटाने का मौका देती है। यह सुविधा उन लोगों के लिए होती है जो किसी कारण से अपना लोन समय पर नहीं चुका पाते हैं और लगातार डिफॉल्ट कर रहे होते हैं।
सेटलमेंट के तहत बैंक एकमुश्त राशि (लंपसम अमाउंट) पर सहमति बना सकता है, जिससे लोन बंद हो जाता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि Loan Settlement करने से आपका CIBIL स्कोर प्रभावित हो सकता है, जिससे भविष्य में आपको लोन लेने में मुश्किल हो सकती है। इसलिए, इसे अंतिम विकल्प के रूप में ही अपनाना चाहिए।
निम्नलिखित दस्तावेजों की जरुरत होती हैं:
आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, या ड्राइविंग लाइसेंस आदि।
सैलरी स्लिप, आयकर रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट आदि।
Loan Settlement लेटर, कर्ज विवरण, भुगतान रसीदें आदि।
निवेश के दस्तावेज़, संपत्ति के दस्तावेज़, बीमा पॉलिसी आदि।
अगर आप इसे ऑनलाइन अप्लाई करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करें:
बैंक की वेबसाइट या ऐप पर जाएं
अपने लोन प्रदाता या बैंक की ऑफिसियल वेबसाइट या मोबाइल ऐप को खोलें।
साइन अप करें, अगर पहले से अकाउंट है, तो लॉग इन करें। नहीं तो नया अकाउंट बनाएं।
कस्टमर सपोर्ट सेक्शन देखें
वेबसाइट या ऐप पर 'Customer Support' या 'Contact Us' सेक्शन पर जाएं।
यहां आपको "Loan Settlement" से संबंधित विकल्प मिल सकता है, जैसे:
लोन से जुड़ी शिकायत दर्ज करना।
Loan Settlement के लिए रिक्वेस्ट फॉर्म।
सेटलमेंट करने के लिए रिक्वेस्ट फॉर्म भरें
"Loan Settlement Request" विकल्प चुनें।
मांगी गई जानकारी भरें, जैसे:
आपका नाम
लोन अकाउंट नंबर
ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर
कारण (क्यों आप सेटलमेंट करना चाहते हैं, जैसे वित्तीय समस्या या आय में कमी)।
जरूरी दस्तावेजो को अपलोड करें
अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति को दिखाने वाले दस्तावेज अपलोड करें, जैसे:
इनकम सर्टिफिकेट या सैलरी स्लिप
बैंक स्टेटमेंट
कोई अन्य प्रमाण जो आपकी समस्या को स्पष्ट करे।
सभी दस्तावेज स्कैन करके सही फॉर्मेट में अपलोड करें (PDF या JPEG)।
सबमिट करें और बैंक की तरफ से जवाब आने का इंतजार करें
फॉर्म सबमिट करने के बाद, बैंक आपकी रिक्वेस्ट की जांच करेगा।
आमतौर पर बैंक 7-10 वर्किंग डेज़ में आपसे संपर्क करता है। वे ईमेल, कॉल, या मैसेज के जरिए सेटलमेंट की जानकारी देंगे।
बैंक के ऑफर को समझें
बैंक आपके बकाया राशि का एक हिस्सा माफ करने का प्रस्ताव देगा। इसे ध्यान से पढ़ें।
अगर आपको ऑफर स्वीकार है, तो आगे बढ़ें। नहीं तो और बातचीत करें।
भुगतान करें
बैंक द्वारा तय की गई सेटलमेंट राशि को ऑनलाइन पेमेंट मोड के जरिए चुकाएं।
बैंक आपको पेमेंट का कन्फर्मेशन देगा और आपका लोन खाता बंद कर देगा।
हालांकि, Loan Settlement और Credit Card Loan Settlement दोनों का उद्देश्य कर्जदार को राहत देना होता है, लेकिन इनमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर भी होते हैं।
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अंतर के बिंदु |
Loan Settlement |
Credit Card Loan Settlement |
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प्रकार |
किसी भी प्रकार के लोन (पर्सनल, होम, कार, एजुकेशन, आदि) का निपटारा |
केवल क्रेडिट कार्ड के बकाया राशि का निपटारा |
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सेटलमेंट प्रक्रिया |
बैंक एकमुश्त राशि को तय करता है, जिसे चुकाने पर लोन सेटल हो जाता है। |
क्रेडिट कार्ड कंपनी एक तय की गई राशि पर समझौता करती है। |
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CIBIL स्कोर पर प्रभाव |
CIBIL स्कोर 50-100 पॉइंट तक गिर सकता है और भविष्य में लोन लेना मुश्किल हो सकता है |
CIBIL स्कोर पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है, और नए क्रेडिट कार्ड पाना मुश्किल हो सकता है। |
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भविष्य में लोन मिलने की संभावना |
होम लोन, कार लोन या अन्य लोन प्राप्त करने में समस्या आ सकती है |
क्रेडिट कार्ड कंपनियां कार्ड जारी करने से इनकार कर सकती हैं। |
Loan Settlement का आपके CIBIL स्कोर पर सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब कोई व्यक्ति किसी बैंक या NBFC से लोन लेता है और किसी कारणवश पूरी राशि चुकाने में असमर्थ होता है, तो बैंक उसे एक समझौता करने का मौका देता है, जिसे Loan Settlement कहा जाता है।
हालांकि, Loan Settlement और Loan Closure में बहुत बड़ा अंतर होता है। अगर आप अपने लोन की पूरी राशि चुकाकर उसे बंद करते हैं, तो यह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में "Closed" के रूप में दर्ज होता है, जिससे आपका CIBIL स्कोर बेहतर होता है। लेकिन अगर आपने लोन की कुछ राशि बैंक के साथ समझौते के तहत माफ करवा ली है, तो इसे "Settled" के रूप में रिपोर्ट किया जाता है, जो आपके क्रेडिट स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है।
जब बैंक या NBFC CIBIL को रिपोर्ट करता है कि आपका लोन "Settled" है, तो आपका स्कोर तुरंत गिर जाता है। गिरावट कितनी होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका पहले का स्कोर कितना अच्छा था।
बैंक और फाइनेंशियल संस्थान ऐसे ग्राहकों को "हाई-रिस्क" कैटेगरी में रखते हैं, जिन्होंने अपना लोन सेटल किया है। इसका मतलब यह है कि भविष्य में अगर आप किसी भी प्रकार का लोन (पर्सनल, होम, कार, एजुकेशन) लेने की कोशिश करेंगे, तो आपका आवेदन अस्वीकार किया जा सकता है।
अगर आपने लोन सेटल किया है, तो भविष्य में किसी भी बैंक से क्रेडिट कार्ड प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है। बैंक आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को देखते हैं और यदि उन्हें "Settled" स्टेटस दिखता है, तो वे आपको क्रेडिट कार्ड देने से इनकार कर सकते हैं।
अगर किसी बैंक ने आपको लोन देने का फैसला किया भी, तो आपको बहुत ज्यादा ब्याज दर (High Interest Rate) पर लोन मिल सकता है। यह इसलिए क्योंकि बैंक आपको जोखिम भरा ग्राहक मानते हैं और अपने पैसे की सुरक्षा के लिए ज्यादा ब्याज दर लगाते हैं।
Loan Settlement की जानकारी आपकी CIBIL Report में कम से कम 7 साल तक बनी रहती है। इसका मतलब है कि भले ही आप बाद में अपना वित्तीय व्यवहार सुधार लें, लेकिन आपका सेटलमेंट रिकॉर्ड बैंकों को दिखता रहेगा और आपकी क्रेडिट योग्यता को प्रभावित कर सकता है।
अगर आपने लोन सेटल कर लिया है और अब CIBIL स्कोर सुधारना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कदम उठा सकते हैं:
समय पर सभी लोन और क्रेडिट कार्ड के बिल का पूरा भुगतान करें।
अगर संभव हो तो बैंक से संपर्क करके "Settled" स्टेटस को "Closed" में बदलवाने" की कोशिश करें।
क्रेडिट कार्ड का सीमित इस्तेमाल करें और समय पर पूरा भुगतान करें।
कोई छोटा लोन लें और उसे नियमित रूप से चुकाएं ताकि नया अच्छा क्रेडिट इतिहास बन सके।
CIBIL Report को नियमित रूप से चेक करें और किसी भी गलती को सुधारने के लिए CIBIL को अनुरोध दें।
सेटलमेंट की प्रक्रिया का समय अलग - अलग कारकों पर भी निर्भर करता है, जैसे आपके बैंक या लोन देने वाली संस्था की पॉलिसी, बकाया राशि, और आप दोनों के बीच बातचीत। आमतौर पर यह प्रक्रिया 1 से 3 महीने तक का समय ले सकती है।
सेटलमेंट की प्रक्रिया में सबसे पहला कदम बैंक से बातचीत करना होता है, जहां आप अपनी मुश्किलों और भुगतान की स्थिति के बारें में बैंक को समझाते हैं। इसके बाद, बैंक आपकी स्थिति के आधार पर एक सेटलमेंट का ऑफर देता है। अगर आप उस ऑफर को स्वीकार करते हैं, तो बैंक को तय समय सीमा के भीतर भुगतान करना होता है। फिर बैंक लोन को सेटल के रूप में रिपोर्ट करता है, जो कुछ समय ले सकता है।
इस पूरी प्रक्रिया में जितना ज्यादा समय लगेगा, उतना ही आपके CIBIL स्कोर पर प्रभाव डाल सकता है, इसलिए जल्दी से जल्दी समाधान तलाशना बेहतर रहता है।
अगर आपने किसी बैंक से पर्सनल लोन लिया है और किसी कारणवश उसे पूरी तरह चुकाने में असमर्थ होते हैं, तो Loan Settlement आपके लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। Loan Settlement का मतलब होता है कि बैंक और उधारकर्ता (लोन लेने वाला व्यक्ति) के बीच एक समझौता होता है, जिसमें बैंक ब्याज या पेनल्टी को कम करके एक निश्चित राशि पर लोन निपटाने के लिए सहमत हो जाता है। जब Loan Settlement पूरा हो जाता है, तो बैंक एक Loan Settlement Letter जारी करता है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि लोनदाता और बैंक के बीच समझौता हुआ है और अब उधारकर्ता पर कोई बकाया नहीं है।
आइए आसान भाषा में इनके बीच का फर्क समझते हैं:
1. परिभाषा (Definition)
Loan Settlement (Loan Settlement): यह एक बैंक और कर्जदार के बीच आपसी समझौता होता है। इसमें बैंक यह मान लेता है कि कर्जदार पूरा लोन नहीं चुका सकता है, इसलिए वह तय रकम लेकर बाकी राशि माफ कर देता है।
Bankruptcy (दिवालियापन): यह एक कानूनी प्रक्रिया होती है। जब कोई व्यक्ति या संस्था अपनी कुल देनदारियों को चुकाने में असमर्थ होता है, तो वह अदालत में दिवालियापन की अर्जी लगाता है और अदालत तय करती है कि उसकी संपत्ति कैसे बाँटी जाएगी।
2. प्रक्रिया (Process)
Loan Settlement: यह एक गैर-कानूनी प्रक्रिया होती है, जो सीधे बैंक और ग्राहक के बीच होती है। इसमें कोई अदालत शामिल नहीं होती हैं।
Bankruptcy: यह न्यायिक प्रक्रिया होती है, जिसमें कोर्ट और इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल शामिल होते हैं।
3. कर्ज से छुटकारा (Debt Relief)
Loan Settlement: कुछ हिस्सा चुकाने के बाद बाकी लोन माफ हो सकता है, लेकिन CIBIL Report में “Settled” का टैग लगता है।
Bankruptcy: कोर्ट फैसला करता है कि कौन-सा कर्ज माफ होगा और कौन नहीं। इससे पूरी तरह कर्ज से छुटकारा मिल सकता है, पर संपत्ति जब्त हो सकती है।
4. CIBIL स्कोर पर असर
Loan Settlement: CIBIL स्कोर पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ता है। “Settled” का टैग भविष्य में लोन मिलने में बाधा बन सकता है।
Bankruptcy: CIBIL स्कोर पूरी तरह गिर जाता है और इसका लम्बा प्रभाव होता है।
5. लागत और समय (Cost & Time)
Loan Settlement: यह प्रक्रिया जल्दी पूरी हो जाती है और कानूनी खर्च नहीं होता हैं।
Bankruptcy: यह एक लंबी और खर्चीली प्रक्रिया हो सकती है, जिसमें वकीलों और प्रोफेशनल्स की जरूरत होती है।
नीचे आसान भाषा में बताया गया है कि Loan Settlement के पीछे की कानूनी प्रक्रिया क्या होती है:
1. लोन डिफॉल्ट और NPA घोषित करना:
अगर उधारकर्ता लगातार 90 दिनों तक लोन की EMI नहीं चुकाता है, तो बैंक उस लोन अकाउंट को NPA (Non-Performing Asset) घोषित कर देता है। यह RBI के नियमों के अनुसार किया जाता है।
2. डिमांड नोटिस और रिकवरी नोटिस:
लोन डिफॉल्ट के बाद बैंक उधारकर्ता को एक डिमांड नोटिस भेजता है, जिसमें बकाया राशि, भुगतान की अंतिम तिथि और संभावित कानूनी कार्रवाई का उल्लेख होता है। अगर इसके बाद भी भुगतान नहीं होता हैं, तो बैंक Recovery Agent भेज सकता है या कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
3. Settlement Proposal:
अगर उधारकर्ता आर्थिक रूप से बहुत कमजोर है और पूरे लोन का भुगतान असंभव है, तो वह बैंक से Loan Settlement का प्रस्ताव कर सकता है। कई बार बैंक भी खुद यह प्रस्ताव देता है, ताकि उन्हें कम से कम कुछ राशि वापस मिल जाए।
4. दस्तावेज और आवेदन:
उधारकर्ता को अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति के सबूत देने होते हैं – जैसे कि आय कम हो गई हो, नौकरी चली गई हो, बीमारी हो या कोई पारिवारिक संकट हो। इस पर बैंक अपनी settlement committee में विचार करता है।
5. Settlement Agreement और Letter:
अगर बैंक settlement को मंजूरी देता है, तो एक written settlement agreement या settlement letter जारी किया जाता है, जिसमें यह साफ लिखा होता है कि:
कितनी राशि चुकानी है
कब तक चुकानी है
भुगतान के बाद बैंक कौन-कौन से दस्तावेज देगा
यह दस्तावेज कानूनी रूप से मान्य होता है।
6. भुगतान और NOC:
निर्धारित राशि का भुगतान करने के बाद बैंक आपको एक NOC (No Objection Certificate) और No Dues Certificate देता है। यह प्रमाण होता है कि आपने settlement terms को पूरा कर दिया है।
इसके निम्नलिखित फायदे और नुकसान होते हैं:
फायदे
हालांकि Loan Settlement करने से कर्जदार का CIBIL Score प्रभावित हो सकता है, लेकिन समय पर और सही तरीके से समझौते का पालन करने से वह अपने CIBIL Score को धीरे-धीरे सुधार सकता है।
Loan Settlement करने से कर्जदार की वित्तीय स्थिति में सुधार होता है।
Loan Settlement के माध्यम से, कर्जदार को अपने कर्ज का कुछ हिस्सा माफ करवाने का मौका मिलता है।
यह उसकी वित्तीय स्थिति को सुधारने में मदद करता है और उसे भारी वित्तीय बोझ से राहत दिलवाता है।
Loan Settlement करने से आप अपनी आय और लागत को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं और भविष्य में वित्तीय संकट से बच सकते हैं।
कर्ज का भारी बोझ अक्सर मानसिक तनाव का कारण बनता है। Loan Settlement से कर्जदार को इस तनाव से राहत मिलती है और वह अपने जीवन में मानसिक शांति पा सकता है।
नुक्सान
Loan Settlement के माध्यम से, कर्जदार का पूरा लोन माफ नहीं होता है। उसे अभी भी कुछ राशि का भुगतान करना होता है, जो उसकी वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
Loan Settlement के दौरान, बैंक और कर्जदार के बीच जो समझौता होता है, उसमें कई शर्तें होती हैं। कर्जदार को इन शर्तों का पालन करना जरूरी होता है, जिससे उसकी स्वतंत्रता सीमित हो सकती है।
Loan Settlement के कारण, कर्जदार के बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ संबंध खराब हो सकते हैं।
भविष्य में, कर्जदार को इन संस्थानों से कर्ज प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।
Loan Settlement के बाद, कर्जदार का CIBIL Score प्रभावित हो सकता है।
Loan Settlement भविष्य में नए कर्ज लेने या क्रेडिट कार्ड प्राप्त करने में कठिनाइयाँ पैदा कर सकता है।
आइए आसान शब्दों में समझते हैं।
जब कोई व्यक्ति या कंपनी बैंक का पूरा लोन चुकाने में असमर्थ हो जाती है, तो बैंक उसके साथ एक समझौता (Settlement) करता है। इसमें:
मूल रकम या ब्याज का कुछ हिस्सा माफ किया जाता है
ग्राहक को एकमुश्त रकम या आसान किश्तों में भुगतान करने का विकल्प दिया जाता है
यह समाधान आमतौर पर बैंक और ग्राहक के बीच आपसी सहमति से होता है
IBC Code 2016 के तहत, जब कोई डिफॉल्टर (Loan Defaulter) समय पर कर्ज नहीं चुका पाता हैं, तो बैंक या कर्जदाता उस पर IBC प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। इसमें:
कंपनी या व्यक्ति को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया होती है
एक Resolution Professional नियुक्त होता है
कंपनी की संपत्ति को बेचकर कर्ज चुकाने का रास्ता ढूंढा जाता है
पूरा प्रोसेस अधिकतम 270 दिनों में पूरा किया जाता है
अब बात करते हैं असली कनेक्शन की:
a. समाधान की प्रक्रिया का हिस्सा:
IBC के तहत जब किसी डिफॉल्टर के खिलाफ कार्यवाही होती है, तो कई बार उसका समाधान एक Settlement Plan के रूप में निकलता है। इसमें बैंकों को तय रकम मिलती है, और कंपनी को शेष कर्ज से राहत मिलती है। यह एक तरह का लोन सेटलमेंट ही होता है — परंतु यह कानूनी रूप से नियंत्रित और NCLT द्वारा स्वीकृत होता है।
b. दबाव बनाने का माध्यम:
जब कोई व्यक्ति या कंपनी लोन नहीं चुकाती हैं, तो बैंक IBC की प्रक्रिया शुरू करने की धमकी देकर सेटलमेंट पर बातचीत करते हैं। इससे डिफॉल्टर बातचीत करने और सेटलमेंट करने के लिए मजबूर हो जाता है।
c. सुरक्षित रास्ता:
IBC के माध्यम से किया गया लोन सेटलमेंट अधिक पारदर्शी, न्यायिक और समयबद्ध होता है। इससे बैंकों को भरोसेमंद वसूली और डिफॉल्टर को कानूनी राहत मिलती है।
नीचे हम विस्तार से जानेंगे कि यह कैसे किया जा सकता है।
1. सबसे पहले बैंक से संपर्क करें
जब लोन को NPA घोषित कर दिया जाता है, तो borrower को सबसे पहले अपने बैंक या फाइनेंशियल संस्था से सीधा संपर्क करना चाहिए।
डरने की जगह बातचीत करें।
बैंक को अपनी आर्थिक स्थिति के बारें में बताएं।
बताएं कि आप लोन चुकाना चाहते हैं लेकिन मौजूदा हालात में पूरा भुगतान नहीं कर सकते हैं।
2. OTS (One-Time Settlement) का प्रस्ताव मांगे
बैंक अकसर NPA खातों के लिए OTS स्कीम लाते हैं, जिसमें
कुछ राशि माफ कर दी जाती है,
बाकी रकम एकमुश्त या किश्तों में चुकानी होती है।
3. सेटलमेंट की डील को लिखित में लें (Settlement Letter/NOC)
अगर बैंक आपके सेटलमेंट प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है, तो:
उनसे लिखित समझौता पत्र (Settlement Letter) लें।
भुगतान पूरा करने के बाद NOC (No Objection Certificate) लेना बिल्कुल न भूलें।
यह भविष्य में आपके लिए सबूत का काम करेगा।
4. CIBIL स्कोर पर असर को समझें
NPA लोन का सेटलमेंट आपके CIBIL स्कोर पर असर डालता है।
आपका स्कोर कुछ समय के लिए गिर सकता है।
लेकिन समय पर अन्य बिल/क्रेडिट कार्ड/EMI चुकाने से आप स्कोर को फिर से सुधार सकते हैं।
5. भविष्य में पुनः डिफॉल्ट से बचें
फाइनेंशियल प्लानिंग करें
ज़रूरत के हिसाब से ही लोन लें
समय पर किश्त चुकाएं
बजट बनाकर खर्च करें
आज के समय में जब लोन लेना एक आम जरुरत बन चुकी है, ऐसे में एक भरोसेमंद Loan Consultant की भूमिका बहुत अहम हो जाती है। चाहे आप पर्सनल लोन लेना चाह रहे हों, होम लोन, एजुकेशन लोन या फिर बिजनेस लोन – सही मार्गदर्शन के बिना यह प्रक्रिया आपके लिए मुश्किल, समय लेने वाली और महंगी साबित हो सकती है। एक अनुभवी लोन कंसल्टेंट न केवल आपकी जरूरतों को समझता है, बल्कि आपकी योग्यता के अनुसार सबसे उपयुक्त बैंक, सबसे कम ब्याज दर और आसान दस्तावेज प्रक्रिया वाला विकल्प सुझाता है।
लेकिन, ध्यान रखें कि हर कोई जो खुद को Loan Consultant कहता है, जरूरी नहीं कि वो आपके हित में काम करे। इसलिए सही कंसल्टेंट का चयन करना बहुत ज़रूरी है। आपको उनके अनुभव, कस्टमर रिव्यू, बैंक से संबंध, और व्यवहार में पारदर्शिता को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए। एक अच्छा Loan Consultant कभी आपसे छुपे हुए चार्ज नहीं लेता हैं और आपको EMI, ब्याज दर व शर्तों की पूरी जानकारी देता है।
अंततः, एक सही Loan Consultant न केवल आपको लोन दिलवाने में मदद करता है, बल्कि आपकी आर्थिक योजना को बेहतर और सुरक्षित भी बनाता है। यह आपको समय, पैसे और मानसिक तनाव से बचाता है। इसलिए अगर आप लोन लेने की सोच रहे हैं, तो जल्दबाज़ी करने से बेहतर है कि एक अनुभवी और भरोसेमंद कंसल्टेंट से संपर्क करें – जो आपको सही रास्ता दिखाए और आपके सपनों को पूरा करने में सहायक बने।
Que: Loan Settlement और लोन रिपेमेंट में क्या अंतर है?
Ans: लोन रिपेमेंट का मतलब है पूरे लोन और ब्याज की तय रकम समय पर चुकाना। Loan Settlement का मतलब है कि बैंक कुछ राशि माफ कर देता है और बाकी रकम लेकर खाता बंद कर देता है।
Que: क्या Loan Settlement करने से CIBIL स्कोर पर असर पड़ता है?
Ans: हां, Loan Settlement को CIBIL Report में “Settled” के रूप में दिखाया जाता है, जो भविष्य में आपकी क्रेडिट योग्यता को प्रभावित कर सकता है। इससे स्कोर घट सकता है।
Que: OTS (One Time Settlement) स्कीम क्या है?
Ans: OTS एक ऐसी योजना होती है जिसमें बैंक उधारकर्ता को एक निश्चित राशि एकमुश्त (या निर्धारित किश्तों में) चुकाकर लोन से मुक्त होने का मौका देता है। इसमें कुछ ब्याज या मूलधन माफ किया जा सकता है।
Que: NPA क्या होता है?
Ans: NPA का मतलब होता है Non-Performing Asset, यानी ऐसा लोन जिसकी EMI या ब्याज की किश्तें 90 दिनों (3 महीने) से ज्यादा समय तक नहीं चुकाई गई हैं। ऐसे लोन को बैंक "बुरा लोन" मानते हैं और NPA घोषित कर देते हैं।
Que: क्या NPA घोषित होने के बाद भी लोन चुकाया जा सकता है?
Ans: हां, NPA घोषित होने के बाद भी लोन चुकाया जा सकता है। इसके लिए आप बैंक से संपर्क कर One Time Settlement (OTS) या किश्तो में भुगतान करने की व्यवस्था कर सकते हैं|