जब कोई व्यक्ति बैंक या फाइनेंशियल संस्था से लोन लेता है और समय पर उसकी किश्ते (EMIs) नहीं चुका पाता हैं, तो उसे Loan Default कहा जाता है। लगातार 90 दिन या उससे ज्यादा समय तक EMI न चुकाने पर बैंक आपके लोन अकाउंट को NPA (Non-Performing Asset) घोषित कर देता है और रिकवरी की प्रक्रिया शुरू करता है। इसमें नोटिस, रिकवरी एजेंट और कानूनी कार्यवाही भी शामिल हो सकती है।
ऐसे समय में अगर लोनधारक की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है और वह आगे भुगतान करने की स्थिति में नहीं होता हैं, तो वह Loan Settlement का विकल्प चुन सकता है। लोन सेटलमेंट एक आपसी समझौता होता है जिसमें बैंक लोन की कुछ रकम माफ करके शेष बची हुई राशि को लेकर लोन को बंद कर देता है। उदाहरण के लिए, अगर आपने ₹5 लाख का लोन लिया और ₹2 लाख चुका चुके हैं, तो बैंक कह सकता है कि आप ₹1.5 लाख और दे दीजिए, हम बाकी माफ कर देंगे।
सेटलमेंट की प्रक्रिया में सबसे पहले बैंक से संपर्क करना होता है, एक लिखित आवेदन देना होता है और अपनी वित्तीय स्थिति को सही तरीके से पेश करना होता है। अगर बैंक को लगता है कि उधारकर्ता आगे भुगतान नहीं कर सकेगा, तो वह सेटलमेंट ऑफर देता है। सेटलमेंट राशि चुकाने के बाद बैंक एक NOC (No Objection Certificate) और लोन क्लोजर लेटर देता है।
आज के समय में लोगो के लिए लोन लेना बहुत आम हो गया है। चाहे घर खरीदना हो, कार लेनी हो या बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसों की ज़रूरत हो, लोग बैंकों या फाइनेंशियल संस्थानों से लोन लेते हैं। लोन लेने के समय व्यक्ति यह सोचकर आगे बढ़ता है कि वह समय पर EMI चुका देगा। लेकिन कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं जब कोई व्यक्ति लोन की किश्तें (EMIs) समय पर नहीं चुका पाता हैं, तो इस स्थिति को Loan Default कहा जाता है।
Loan Default तब होता है जब लोन लेने वाला व्यक्ति तय किए गए समय पर अपनी लोन की किश्त नहीं चुकाता हैं और लगातार कई महीनों तक भुगतान नहीं करता हैं। यह स्थिति व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को और भी ज्यादा खराब कर सकती है, क्योंकि इससे उसका CIBIL Score गिर जाता है और भविष्य में लोन या क्रेडिट कार्ड लेने में परेशानी हो सकती है। साथ ही, बैंक या फाइनेंशियल संस्था उस व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है, जिसमें रिकवरी एजेंट भेजना, कोर्ट केस करना या संपत्ति जब्त करना शामिल हो सकता है।
ऐसे मुश्किल समय में कई लोग सोचते हैं कि अब क्या किया जाए? क्या बैंक से कोई समाधान निकाला जा सकता है? क्या यह कर्ज हमेशा के लिए सिर पर रहेगा? इन सभी सवालों का एक उत्तर है – Loan Settlement।
आज के इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि लोन डिफॉल्ट के बाद Settlement कैसे होता है, Loan Settlement करने के फायदे और नुकसान क्या होते हैं, कौन-कौन से दस्तावेज़ लगते हैं, और इस प्रक्रिया के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। अगर आप या आपके जानने वाले इस स्थिति का सामना कर रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बहुत मददगार साबित हो सकती है।
यह एक ऐसी वित्तीय प्रक्रिया होती है जिसमें बैंक या वित्तीय संस्था लोन लेने वाले व्यक्ति को पूरी बकाया लोन की राशि को चुकाने के बजाय कम राशि देकर लोन निपटाने का मौका देती है। यह सुविधा उन लोगों के लिए होती है जो किसी कारण से अपना लोन समय पर नहीं चुका पाते हैं और लगातार डिफॉल्ट कर रहे होते हैं।
सेटलमेंट के तहत बैंक एकमुश्त राशि (लंपसम अमाउंट) पर सहमति बना सकता है, जिससे लोन बंद हो जाता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि लोन सेटलमेंट करने से आपका CIBIL स्कोर प्रभावित हो सकता है, जिससे भविष्य में आपको लोन लेने में मुश्किल हो सकती है। इसलिए, इसे अंतिम विकल्प के रूप में ही अपनाना चाहिए।
जब कोई व्यक्ति अपने पर्सनल लोन की EMI समय पर चुकाने में असमर्थ हो जाता है और लंबे समय तक बकाया राशि जमा हो जाती है, तो बैंक या वित्तीय संस्था लोन सेटलमेंट का विकल्प देती है। इसमें बैंक ग्राहक को पूरी बकाया राशि के बजाय रियायती रकम (discounted amount) चुकाने का मौका देता है, जिससे लोन का मामला निपट जाता है।
सेटलमेंट की प्रक्रिया में ग्राहक और बैंक के बीच बातचीत होती है, जहां बैंक इस बात की पुष्टि करता है कि ग्राहक लोन का पूरा भुगतान नहीं कर सकता हैं। इसके बाद, बैंक एक सिंगल-शॉट पेमेंट ऑफर देता है, जो आमतौर पर बकाया लोन राशि से कम होता है। जब ग्राहक इस सहमत राशि का भुगतान कर देता है, तो बैंक लोन को “Settled” के रूप में रिपोर्ट करता है। हालांकि, यह CIBIL स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है क्योंकि इसे “Complete Payment” नहीं माना जाता हैं।
इसलिए, लोन सेटलमेंट को अंतिम विकल्प के रूप में ही चुनना चाहिए और अगर संभव हो, तो लोन रीपेमेंट प्लान, लोन री-स्ट्रक्चरिंग या अन्य वित्तीय समाधान पर विचार करना चाहिए ताकि क्रेडिट स्कोर खराब न हो।
आइए इन दोनों को विस्तार से समझते हैं:
निम्नलिखित दस्तावेजों की आवशयकता होती हैं:
अगर आप इसे ऑनलाइन अप्लाई करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करें:
बैंक की वेबसाइट या ऐप पर जाएं
कस्टमर सपोर्ट सेक्शन देखें
सेटलमेंट करने के लिए रिक्वेस्ट फॉर्म भरें
जरूरी दस्तावेजो को अपलोड करें
सबमिट करें और बैंक की तरफ से जवाब आने का इंतजार करें
बैंक के ऑफर को समझें
भुगतान करें
इसका असर निम्नलिखित तरीकों से देखा जा सकता है:
सेटलमेंट की प्रक्रिया का समय अलग – अलग कारकों पर भी निर्भर करता है, जैसे आपके बैंक या लोन देने वाली संस्था की पॉलिसी, बकाया राशि, और आप दोनों के बीच बातचीत। आमतौर पर यह प्रक्रिया 1 से 3 महीने तक का समय ले सकती है।
सेटलमेंट की प्रक्रिया में सबसे पहला कदम बैंक से बातचीत करना होता है, जहां आप अपनी मुश्किलों और भुगतान की स्थिति के बारें में बैंक को समझाते हैं। इसके बाद, बैंक आपकी स्थिति के आधार पर एक सेटलमेंट का ऑफर देता है। अगर आप उस ऑफर को स्वीकार करते हैं, तो बैंक को तय समय सीमा के भीतर भुगतान करना होता है। फिर बैंक लोन को सेटल के रूप में रिपोर्ट करता है, जो कुछ समय ले सकता है।
इस पूरी प्रक्रिया में जितना ज्यादा समय लगेगा, उतना ही आपके CIBIL स्कोर पर प्रभाव डाल सकता है, इसलिए जल्दी से जल्दी समाधान तलाशना बेहतर रहता है।
हालांकि दोनों का उद्देश्य लोन को खत्म करना होता है, लेकिन इन दोनों के बीच काफी अंतर होते हैं।
Settlement तब होता है जब उधारकर्ता पूरी लोन की राशि का भुगतान नहीं कर सकता और बैंक या वित्तीय संस्थान से समझौता करता है। इस स्थिति में, बैंक या संस्था उधारकर्ता से कम लोन की राशि लेकर बाकी का लोन माफ कर देती है। इस प्रक्रिया में उधारकर्ता को एकमुश्त राशि चुकानी होती है, जो पूरे लोन से कम होती है। यह आमतौर पर तब होता है जब उधारकर्ता आर्थिक संकट से गुजर रहा होता है या उसकी भुगतान करने की क्षमता पूरी नहीं हो रही होती हैं।
Loan Closure तब होता है जब उधारकर्ता पूरी लोन की राशि का भुगतान करता है, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। इस स्थिति में, लोन को पूरी तरह से चुकता किया जाता है और बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा लोन को बंद कर दिया जाता है। जब लोन का पूरा भुगतान हो जाता है, तो उधारकर्ता को एनओसी (No Objection Certificate) प्रदान किया जाता है, जो यह प्रमाणित करता है कि लोन की पूरी राशि चुका दी गई है और लोन को समाप्त कर दिया गया है।
मुख्य अंतर:
इसके निम्नलिखित फायदे और नुकसान हैं:
फायदे
नुक्सान
चलिए जानते हैं कि loan default के बाद settlement कैसे होता है – step-by-step:
1: अपनी Financial स्थिति की जांच करें
सबसे पहले आपको खुद यह समझना होगा कि आप लोन क्यों नहीं चुका पा रहे हैं – क्या आपकी नौकरी चली गई? क्या मेडिकल इमरजेंसी हुई हैं? या व्यापार में घाटा हुआ हैं?
2: बैंक से संपर्क करें
Settlement की प्रक्रिया शुरू करने के लिए आपको बैंक या फाइनेंशियल संस्था से संपर्क करना होगा। यह काम आप खुद भी कर सकते हैं या फिर किसी Loan Settlement Advisor की मदद भी ले सकते हैं।
3: Written Application दें
आपको बैंक को एक लिखित पत्र (application) देना होता है जिसमें यह बताया जाता है कि आप किस कारण से लोन चुकाने में असमर्थ हैं और आप settlement का रिक्वेस्ट कर रहे हैं।
4: बैंक द्वारा Settlement Offer
अगर बैंक को लगता है कि आपकी आर्थिक स्थिति सच में कमजोर है और लोन की पूरी राशि वसूलना मुश्किल है, तो वे एक settlement offer दे सकते हैं। इसमें वे कह सकते हैं कि अगर आप ₹5 लाख की बजाय ₹3 लाख चुका दें, तो वे केस बंद कर देंगे।
5: Negotiation करें
Settlement एक बातचीत की प्रक्रिया होती है। आप बैंक के ऑफर से सहमत न हों तो आप बातचीत करके इसे और कम करवा सकते हैं।
6: Written Agreement लें
बैंक से जो भी settlement तय हो, उसे written agreement के रूप में लें।
7: Payment करें और NOC लें
Settlement की राशि तय हो जाने के बाद आपको तय समय में उसे भरना होता है। भुगतान के बाद बैंक से NOC (No Objection Certificate) और Loan Closure Letter लेना न भूलें।
लोन लेना आजकल हमारी ज़रूरतों का एक बहुत ही अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन जब किसी कारणवश हम लोन की EMI को समय पर नहीं चुका पाते हैं और यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो वह Loan Default कहलाती है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दबाव में आ जाता है। बैंक बार-बार नोटिस भेजता है, रिकवरी एजेंट घर पर आते हैं और भविष्य में लोन या क्रेडिट कार्ड लेने की संभावनाएं भी कम हो जाती हैं।
ऐसे मुश्किल समय में लोन सेटलमेंट एक रास्ता हो सकता है जो आपको राहत दे सकता है। यह एक समझौता होता है जिसमें बैंक मान जाता है कि आप पूरी रकम नहीं चुका सकते हैं, इसलिए वह एक तय की गई छोटी राशि लेकर लोन खाता बंद कर देता है। हालांकि यह समाधान पूरी तरह से ‘आदर्श’ नहीं होता हैं, क्योंकि इससे आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में ‘Settled’ का टैग लग जाता है, जो आगे आपकी वित्तीय विश्वसनीयता को प्रभावित करता है।
लोन सेटलमेंट एक अंतिम उपाय होना चाहिए, तब जब आपके पास सचमुच कोई दूसरा विकल्प न हो। इससे पहले आपको बैंक से EMI रिस्ट्रक्चरिंग, मोराटोरियम, या टेम्पररी रिलीफ की भी बात करनी चाहिए। अगर बैंक समझता है कि आप आगे भी भुगतान नहीं कर पाएंगे, तभी वह सेटलमेंट की प्रक्रिया पर भी विचार करता है।
Que: क्या Loan Settlement करने से भविष्य में लोन लेने में दिक्कत होती है?
Ans: हां, Loan Settlement करने से आपकी क्रेडिट रिपोर्ट पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे भविष्य में आपको लोन प्राप्त करने में मुश्किल हो सकती है।
Que: Loan Closure के बाद CIBIL स्कोर पर क्या असर पड़ता है?
Ans: Loan Closure के बाद अगर आपने पूरी राशि चुकता की है, तो CIBIL स्कोर पर सकारात्मक असर पड़ता है, क्योंकि यह आपकी क्रेडिट जिम्मेदारी को दर्शाता है।
Que: क्या Loan Settlement के बाद बाकी का लोन कभी चुकता किया जा सकता है?
Ans: Loan Settlement के बाद, बैंक या लेंडिंग एजेंसी द्वारा माफ किया गया हिस्सा कभी नहीं चुकता किया जा सकता हैं। हालांकि, अगर आपके पास पैसे होते हैं, तो आप बाकी की राशि चुकता कर सकते हैं, लेकिन इससे पहले सेटलमेंट के समझौते को ध्यान में रखते हुए काम करना होगा।
Que: Loan Closure की प्रक्रिया कितने समय में पूरी होती है?
Ans: Loan Closure की प्रक्रिया आमतौर पर कुछ दिनों से लेकर एक सप्ताह तक पूरी हो सकती है, बशर्ते आप पूरी राशि का भुगतान कर चुके हों और बैंक से सभी दस्तावेज प्राप्त कर चुके हों।
Que: Loan Settlement का निर्णय लेने से पहले किन बातों पर विचार करें?
Ans: Loan Settlement का निर्णय लेने से पहले आपको अपनी वित्तीय स्थिति, बैंक के साथ समझौते के शर्तें, और इस प्रक्रिया के दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करना चाहिए। CIBIL स्कोर पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना भी जरूरी है।